Posts

तीर्थयात्रा_दुर्गम_ही_होनी_चाहिए

Image
#तीर्थयात्रा_दुर्गम_ही_होनी_चाहिए ''महत्त्वपूर्ण पोस्ट'' पिछले महीने जून में मैं हरिद्वार में था, एक दिन चंडी देवी दर्शन को जाने का मन हुआ, विस्वास ही नही हुआ कि, इस गर्मी में वहां इतनी भीड़ थी,  मंदिर और उसका परिसर, भयानक बेलगाम भीड़, दो सेकेंड से ज्यादा शायद ही कोई विग्रह के समक्ष ठहर पाया होगा, उससे पहले शिवरीनारायण मेले में भीड़ देखी, यहां तक भगवान को भोग लगाने के समय जब पट बंद हुए तो देखा कि लोग पट बंद होने का विरोध करने लगे, मंदिर में ही लोग चिल्लाने लगे थे,  अब केदारनाथ की खबरें आ रही हैं, लोगों को ढोने वाले करीब 400 घोड़े खच्चर मर गए इस साल, मोटे मुस्तंडों को ढोते ढोते,  राजा दशरथ चक्रवर्ती सम्राट थे किंतु पुत्रेष्टि यज्ञ के निमित्त ऋषि श्रृंगि के समक्ष अपने पैरों से नंगे पैर चलकर गए थे,  राजा सगर के साठ हज़ार पुत्रों के तर्पण के लिए राजा दिलीप के प्रारम्भ से भगीरथ तक ने अपने पुरुषार्थ से गंगावतरण कराया,  चौदह वर्षों तक वन वन भटकने वाले भगवान राम ने किसी की सवारी नही की, बारह वर्ष तक वनवास भोगने वाले सपत्नीक पांडवों ने कभी रथ आदि का उपयोग नही...

श्रीकृष्णनाम और पारस पत्थर

Image
*श्रीकृष्णनाम और पारस पत्थर..!!* पारस लोहे को सोना बनाता है; किन्तु कृष्ण नाम से मनुष्य देह ही कंचन बन जाती है । जानें, सनातन गोस्वामी और पारस पत्थर  एक भक्ति कथा । एक बार ‘कृष्ण’ नाम ही हर लेता है जितने पाप। नहीं जीव की शक्ति, कर सके वह जीवन में उतने पाप।। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—‘जो भजता है मुझको और मांगता है सांसारिक-सुख; वह व्यक्ति अमृत छोड़कर विष मांगता है; वह बड़ा मूर्ख है। पर मैं तो समझदार हूँ; मैं उस मूर्ख को विष (सांसारिक-सुख) क्यों दूंगा? मैं उसे अपने चरणों की भक्ति देकर सांसारिक-सुखों को विस्मृत करा (भुला) देता हूँ।’ इसी तथ्य को दर्शाती एक सुन्दर कथा है— गौड़ देश में एक ब्राह्मण निर्धनता के कारण बहुत दु:खी था। जहां कहीं भी वह सहायता मांगने जाता, सब जगह उसे तिरस्कार मिलता। वह ब्राह्मण शास्त्रों को जानने वाला व स्वाभिमानी था। उसने संकल्प किया कि जिस थोड़े से धन व स्वर्ण के कारण धनी लोग उसका तिरस्कार करते हैं, वह उस स्वर्ण को मूल्यहीन कर देगा। वह अपने तप से पारस प्राप्त करेगा और सोने की ढेरियां लगा देगा। लेकिन उसने सोचा कि ‘पारस मिलेगा कहां? ढूँढ़ने से तो वह मि...

श्रीकृष्ण, सुदामा और यमराज

Image
* श्रीकृष्ण, सुदामा और यमराज * जब भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा जी को तीनों लोकों का स्वामी बना दिया तो सुदामा जी की संपत्ति देखकर यमराज से रहा न गया ! यम भगवान को नियम कानूनों का पाठ पढ़ाने के लिए अपने बहीखाते लेकर द्वारिका पहुंच गये ! भगवान से कहने लगे कि - अपराध क्षमा करें भगवन लेकिन सत्य तो ये है कि यमपुरी में शायद अब मेरी कोई आवश्यकता नही रह गयी है इसलिए में पृथ्वी लोक के प्राणियों के कर्मों का बहीखाता आपको सौंपने आया हूँ ! इस प्रकार यमराज ने सारे बहीखाते भगवान के सामने रख दिये भगवान मुस्कुराए बोले - यमराज जी आखिर ऐसी क्या बात है जो इतना चिंतित लग रहे हो ? यमराज कहने लगे - प्रभु आपके क्षमा कर देने से अनेक पापी एक तो यमपुरी आते ही नही है वे सीधे ही आपके धाम को चले जाते हैं और फिर आपने अभी अभी सुदामा जी को तीनों लोक दान दे दिए हैं । सो अब हम कहाँ जाएं  ?  यमराज भगवान से कहने लगे - प्रभु ! सुदामा जी के प्रारब्ध में तो जीवन भर दरिद्रता ही लिखी हुई थी लेकिन आपने उन्हें तीनों लोकों की संपत्ति देकर विधि के बनाये हुए विधान को ही बदलकर रख दिया है ! अब कर्मों की प्रधानता तो...

जगन्नाथ की कहानियां -> हेरा पंचमी क्या है? लक्ष्मी देवी गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने क्यों जाती हैं?

Image
हेरा पंचमी क्या है? लक्ष्मी देवी गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने क्यों जाती हैं? हेरा का अर्थ है देखना। पंचमी का अर्थ होता है पांचवां दिन। 5वें दिन लक्ष्मी देवी गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने जाती हैं। लक्ष्मी देवी गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने क्यों जाती हैं? जब स्नान यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ गए, तो लक्ष्मी देवी ने हर्बल पेय और भोजन परोस कर भगवान की देखभाल की। भगवान ने गुंडिचा जाना चाहा। गुंडिचा का अर्थ है वृंदावन लेकिन जब वह बीमार थे तो वे बाहर कैसे जा सकते थे? भगवान ने लक्ष्मी देवी से यह कहकर अनुमति ली,  "मैं सूर्य स्नान के लिए जाना चाहता हूं।"  क्योंकि अगर वे कहते हैं, "लक्ष्मी देवी, मुझे वृंदावन जाना है," तो वे उन्हें अनुमति नहीं देंगी क्योंकि लक्ष्मी अच्छी तरह से जानती है कि वे वापस नहीं आएंगे। क्योंकि भगवान जगन्नाथ हमेशा राधा, गोपियों और गोपों, गायों, व्रजवासियों के नामों का जाप करते रहते हैं। उन्हें लक्ष्मी देवी से अनुमति मिल गई। वे इतने खुश हुए कि वे धीरे-धीरे रथ पर चढ़ गये, गुंडिचा के ...

सफल जीवन के सात्विक नियम

Image
🙏🌹🌻सफल जीवन के सात्विक नियम 🌻🌹🙏               🌱  🌱🌱🍂🍂🍂🌱🌱🌱 सर्व सुखः शान्ति से जीवन जीने के  सनातन धर्म में ज्ञनियों द्वारा कुछ आवश्यक नियम मानव के लिये बनाये गये हैं , जिनका निजी जीवन मे पालन किया जाये तो मनुष्य अपने सतकर्म की बढोतरी करते हुए , निडरतापूर्वक , दृढ़ इच्छाशक्ति का पालन करते हुये अपना परलोक भी सुधार सकता है ;-  🌷घर के मुख्य प्रवेश द्वार को सफाई करके वन्दरवार -     रंगोली से सजाकर रखें  🌷 घर मे जाले ना लगें , लगातार सफाई करते रहें 🌷 घर मे प्रति दिन पूजाघर मे  २ समय की ज्योत        अवश्य  जलायें  🌷 शंखनाद एवं पूजा की घंटी अवश्य बजायें इससे     नकारात्मक प्रभाव दूर होकर सकारात्मकता आती है  🌷घर आंगन मे तुलसी का पौधा लगाकर जल से उचित      दिनों पर ही सींचे  🌷माँ लक्ष्मी की उपासना करें  🌷सूर्य को अधर्य (  जल  ) के साथ प्रणाम नित्य करें  🌷ब्राह्मणों को भोजन समय समय पर खिलायें  🌷एकादशी के द...

पशु पति नाथ मंदिर मे नंदी के दर्शन नही करना चाहिए,क्यों?

Image
पशु पति नाथ  नेपाल के  पशु पति नाथ मंदिर की अनोखी ➖ महिमा➖ 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ अगर आप कभी नेपाल घुमने जाते हैं तो आपको वहां जाकर इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं होगा कि आप एक अलग देश में हैं। कुछ भारत जैसी संस्कृति और संस्कारों को देखकर आप आश्चर्यचकित जरुर हो जायेंगे। आप अगर शिव भगवान के भक्त हैं तो आपको एक बार नेपाल स्थित भगवान शिव का पशुपतिनाथ मंदिर जरूर जाना चाहिए। नेपाल में भगवान शिव का पशुपतिनाथ मंदिर विश्वभर में विख्यात है। इसका असाधारण महत्त्व भारत के अमरनाथ व केदारनाथ से किसी भी प्रकार कम नहीं है। पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से तीन किलोमीटर उत्तर-पश्चिम देवपाटन गांव में बागमती नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित है। यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में शामिल भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर नेपाल में शिव का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। यह मंदिर हिन्दू धर्म के आठ सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। नेपाल में यह भगवान शिव का सबसे पवित्र मंदिर है। इस अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ के दर्शन के लिए भारत के ही...

भगवान विष्णु के चरणों का महत्व; श्री कृष्ण के चरणों में कौन से चिन्ह हैं ?

Image
* भगवान विष्णु के चरणों का महत्व * 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ किसी ने सही ही कहा है कि भगवान के पांव में स्वर्ग होता है। उनके चरणों जैसी पवित्र जगह और कोई नहीं है। इसलिए तो लोग भगवान के चरणों का स्पर्श पाकर अपने जीवन को सफल बनाने की होड़ में लगे रहते हैं।लेकिन भगवान के चरणों का इतना महत्व क्यों है क्या कभी आपने जाना है? भगवान के चरणरज की ऐसी महिमा है कि यदि इस मानव शरीर में त्रिभुवन के स्वामी भगवान विष्णु के चरणारविन्दों की धूलि लिपटी हो तो इसमें अगरू, चंदन या अन्य कोई सुगन्ध लगाने की जरूरत नहीं, भगवान के भक्तों की कीर्तिरूपी सुगन्ध तो स्वयं ही सर्वत्र फैल जाती है। संसार के पालहार व परम दयालु भगवान विष्णु सबमें व्याप्त हैं। शेषनाग की शय्या पर शयन कपने वाले व शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले भगवान विष्णु के चरण-कमल भूदेवी (भूमि) और श्रीदेवी (लक्ष्मी) के हृदय-मंदिर में हमेशा विराजित रहते हैं। भगवान के चरणों से निकली गंगा का जल दिन-रात लोगों के पापों को धोता रहता है। भगवान के चरणरज की ऐसी महिमा है कि यदि इस मानव शरीर में त्रिभुवन के स्वामी भगवान विष्णु के चरणारविन्दों की धूलि ...