07. विश्वजित खण्ड || अध्याय 12 || उशीनर आदि देशों पर प्रद्युम्न की विजय तथा उनकी जिज्ञासा पर मुनिवर अगस्त्य द्वारा तत्वज्ञान प्रतिपादन
07. विश्वजित खण्ड || अध्याय 12 || उशीनर आदि देशों पर प्रद्युम्न की विजय तथा उनकी जिज्ञासा पर मुनिवर अगस्त्य द्वारा तत्वज्ञान प्रतिपादन श्रीनारदजी कहते हैं- राजन् ! दक्षिण सागर में स्नान करके यादवराज प्रद्युम्न वहाँ से सेना सहित उशीनर देश को जीतने के लिये आये, जहाँ ग्वालों की मण्डली के साथ कोटि-कोटि भव्य मूर्तिवाली गौएं विचरती और चरती हैं। उशीनर देश के लोग दूध पीत और गोरे रंग के मनोहर रूप वाले होते हैं। वे मक्खन की भेंट लेकर प्रद्युम्न के सामने गये। उनसे पूजित होकर प्रद्युम्न ने प्रसन्नतापूर्वक उन्हें हाथी, घोड़े रत्न, वस्त्र और भूषण आदि बहुत धन दिया। उशीनर की राजधानी चम्पावती नामक पुरी मणि और रत्नों से सम्पन्न थी। वह राजाओं से उसी प्रकार शोभा पाती थी, जैसे सर्पों से भोगवतीपुरी। चम्पावती के स्वामी वीर राज हेमांगद शीघ्र ही भेंट लेकर आये। उन्होंने श्रीकृष्णकुमार प्रद्युम्न ने उन्हें केसरयुक्त कमलों की माला दी और सहस्त्रदलों की शोभा से सम्पन्न एक दिव्य कमल भी अर्पित किया ।तदनन्तर महाबाहु प्रद्युम्न धनुष धारण किये तथा बार-बार दुन्दुभि बजवाते हुए ...