07. विश्वजित खण्ड || अध्याय 35 || साम्ब द्वारा कालनाभ दैत्य का वध
07. विश्वजित खण्ड || अध्याय 35 || साम्ब द्वारा कालनाभ दैत्य का वध बहुलाश्व बोले- मुने ! आश्चर्य है, प्रद्युम्न कुमार ने बड़ा अद्भुत युद्ध किया। महादैत्य वृक के मारे जाने पर उस समरांगण में क्या हुआ। नारद जी ने कहा- राजन् ! वृक को मारा गया देख महान असुर कालनाभ बार बार धनुष टंकारता हुआ सूअर पर चढ़कर रणभूमि में आया। उस असुर ने समरांगण में अक्रूर को बीस, गद को दस, अर्जुन को दस, सात्यकि को पाँच, कृतवर्मा को दस, प्रद्युम्न को सौ, अनिरुद्ध को बीस, दीप्तिमान को पाँच और साम्ब को सौ बाण मारकर उन सबको घायल कर दिया। उसके बाणों की चोट से दो घड़ी के लिये वे सभी वीर व्याकुल हो गये। उन सबके घोड़े भी मारे गये तथा रथ रणभूमि में चूर-चूर हो गये। उसके हाथ की फुर्ती देखकर रुक्मिणीनन्दन प्रसन्न हो गये। उन्होंने कालनाभ को समरांगण में साधुवाद देकर उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। तत्पश्चात् प्रद्युम्न ने अपना धनुष लेकर उस पर एक बाण रखा। कोदण्ड से छूटे हुए उस बाण ने उस दैत्य के विशालकाय सूअर को ऊपर उठाकर लाख योजन दूर स्वर्गलोक की सीमा तक ले जाकर घुमाते हुए आकाश से भयंकर गर्जना करने वाले समुद्र में गिरा ...