05. मथुराखण्ड || अध्याय 15 || गोपांग्नाओं के साथ उद्धव का कदली-वन में जाना
गर्ग संहिता मथुराखण्ड : अध्याय 15 गोपांग्नाओं के साथ उद्धव का कदली-वन में जाना और वहाँ उनकी स्तुति करके श्रीकृष्ण द्वारा भेजे गये पत्र अर्पित करना श्रीनारदजी कहते है– राजन् ! इस प्रकार श्रीहरि की चर्चा करते हुए नन्द और उद्धव की वह रात एक क्षण के समान व्यतीत हो गयी, उनके हर्ष को बढ़ाने वाली होने के कारण उसका 'क्षणदा' (आनन्ददायिनी) नाम चरितार्थ हो गया। जब ब्राह्ममुहूर्त आया, तब सारी गोपाग्नाओं ने उठकर अपने-अपने द्वार की देहली एवं आँगन लीपकर वहाँ प्रज्जवलित दीप रख दिये। फिर हाथ-पैर धोकर मथानी से रस्सी लगाकर वे स्नेहयुक्त दही को सब ओर से मथने लगीं। मथानी की रस्सी खींचने से चंचल हुए हार और हाथों के कंगन बज रहे थे। उनकी वेणियों से फूल झर-झरकर गिर रहे थे और चमकते हुए कुण्डल उनके कानों की शोभा बढ़ा रहे थे। वे सब-की-सब चन्द्रमुखी, कमलनयनी तथा विचित्र वर्णों के वस्त्र धारण करने के बाद अत्यन्त मनोहर थीं। श्रीकृष्ण और बलदेव के मंगलमय चरित्रों का घर-घर में जहाँ-तहाँ प्रेमपूर्वक गान कर रही थीं। प्रत्येक गोष्ठ में सुन्दर गौएँ इधर-उधर रँभा रही थीं। गली-गली में...