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02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 15 || श्रीराधा का गवाक्ष मार्ग से श्रीकृष्ण के रूप का दर्शन करके प्रेम-विव्हल; ललिता का श्रीकृष्ण से राधा की दशा का वर्णन करना और उनकी आज्ञा के अनुसार लौटकर श्रीराधा को श्रीकृष्ण - प्रीत्यर्थ सत्कर्म करने की प्रेरणा देना

गर्ग संहिता  वृन्दावन खण्ड || अध्याय 15 || श्रीराधा का गवाक्ष मार्ग से श्रीकृष्ण के रूप का दर्शन करके प्रेम-विव्हल; ललिता का श्रीकृष्ण से राधा की दशा का वर्णन करना और उनकी आज्ञा के अनुसार लौटकर श्रीराधा को श्रीकृष्ण - प्रीत्यर्थ सत्कर्म करने की प्रेरणा देना नारदजी कहते हैं-  राजन ! यह मैंने तुम से कालिय-मर्दन रूप पवित्र श्रीकृष्ण-चरित्र कहा। अब और क्या सुनना चाहते हो। बहुलाश्व बोले-  देवर्षे ! जैसे  देवता  अमृत पीकर तथा भ्रमर कमल-कर्णिका का रस लेकर तृप्त नहीं होते, उसी प्रकार  श्रीकृष्ण  की कथा सुनकर कोई भी भक्त तृप्त नहीं होता (वह उसे अधिकाधिक सुनना चाहता है)। जब शिशुरूपधारी परमात्मा  श्रीकृष्ण  रास करने के लिये भाण्डीर वन में गये और उनका यह लघुरूप देखकर श्रीराधा मन ही मन खेद करने लगीं, तब देववाणी ने कहा-‘कल्याणी! सोच न करो। मनोहर  वृन्दावन  में महात्मा श्रीकृष्ण के द्वारा तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा।’ देववाणी द्वारा इस प्रकार कहा गया वह मनोरथ का महासागर किस तरह पूर्ण हुआ और उस मनोहर वृन्दावन में  भगवान श्रीकृष्ण ...