10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 58 || श्रीकृष्ण द्वारा कंस आदि का आवाहन और उनका श्रीकृष्ण को ही परमपिता बताकर इस लोक के माता-पिता से मिले बिना ही वैकुण्ठलोक को प्रस्थान
10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 58 || श्रीकृष्ण द्वारा कंस आदि का आवाहन और उनका श्रीकृष्ण को ही परमपिता बताकर इस लोक के माता-पिता से मिले बिना ही वैकुण्ठलोक को प्रस्थान श्रीगर्गजी कहते हैं- राजन ! इसके बाद महात्मा श्रीकृष्ण के आवाहन करने पर कंस आदि नौ भाई सब के सब वैकुण्ठ से शीघ्र ही वहाँ आ गये। उनको आया देख वहाँ सब लोगों को बड़ा विस्मय हुआ। द्वारका में पहुँचकर उन कंस आदि सब भाइयों ने बारी-बारी से श्रीकृष्ण, बलराम, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध को प्रणाम किया। नरेश्वर ! सुधर्मा सभा में इन्द्र क सिंहासन पर रानी रुचिमती के साथ बैठे हुए महाराज उग्रसेन ने अपने कंस आदि पुत्रों को श्रीकृष्ण स्वरुप एवं चार भुजाधारी देखा। देखकर उन्हें बड़ी प्रसन्नता हुई। वे शंख, चक्र, गदा और पद्म से विभूषित थे तथा पीताम्बर धारण किये श्रीकृष्ण के पास खडे़ थे। राजा ने अपने उन पुत्रों को भी निकट बुलाया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने मन्द मुस्कान के साथ कंस आदि से कहा- ‘देखो, वे दोनों तुम्हारे माता-पिता हैं और तुम्हें देखने के लिए उत्सुक हैं। वीरों ! तुम उनके निकट जाकर भक्तिभाव से नमन करो’। भगवान श्रीकृष्ण का यह...