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10. अश्‍वमेध खण्‍ड || अध्याय 49 || यादवों और कौरवों का घोर युद्ध

10. अश्‍वमेध खण्‍ड || अध्याय 49 || यादवों और कौरवों का घोर युद्ध श्रीगर्गजी कहते हैं- राजन् ! भीष्म, द्रोण और कृप आदि के साथ दुर्योधन ने अपने वीरों के भग्न हुए मुखों को देखकर क्रोधपूर्वक कहा– आश्चर्य की बात है कि नीच यादव स्वयं मौत के मुख में चले आए। क्या वे मूर्ख महाराज धृतराष्ट्र के महान बल को नहीं जानते हैं ? ऐसा कहकर दुर्योधन ने घोड़े, हाथी, रथ और पैदल वीरों से युक्त अपनी चतुरंगिणी सेना युद्ध में यादवों का सामना करने के लिए भेजी। वह ‌विशाल सेना दस अक्षौहिणियों के द्वारा भूतल को कंपित करती और शत्रुओं को डराती हुई बलपूर्वक आगे बढ़ी। उसे आती देख वीरों से विभूषित जाम्बतीनंदन साम्ब ने बड़े हर्ष और उत्साह से अपनी सेना को युद्ध के लिए प्रेरणा दी। तब समस्त कौरव अपनी रक्षा के लिए क्रौञ्च व्यूह का निर्माण करके उसी में सब के सब खड़़े हो गए। उसके मुख भाग में भीष्म खड़े हुए और ग्रीवा भाग में आचार्य द्रोण। दोनों पंखों की जगह कर्ण तथा शुकनि स्थित हुए और पुच्छभाग में दुर्योधन। उस क्रौञ्चव्यूह के मध्य भाग में चतुरंग सैनिकों के साथ कौरवों की विशाल वाहिनी खड़ी हुई। यादवों जब शत्रुओं के लिए दुर्जय उस...