10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 17 || स्त्री राज्य पर विजय और वहाँ की कुमारी रानी सुरूपा का अनिरुद्ध की प्रिया होने के लिए द्वारका को जाना
10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 17 || स्त्री राज्य पर विजय और वहाँ की कुमारी रानी सुरूपा का अनिरुद्ध की प्रिया होने के लिए द्वारका को जाना श्रीगर्गजी कहते हैं – तदनन्तर वहाँ से छूटने पर परम उज्ज्वल अंगों वाला अनिरुद्ध का अश्व यदुकुल के प्रमुख वीरों के साथ उशीनर–जनपद से बड़े–बड़े वीरों को देखता हुआ धीरे–धीरे बाहर निकला। राजन ! इस प्रकार विचरता हुआ वह श्रेष्ठ अश्व प्रत्येक राज्य में गया और बहुत से नरेशों ने उसको पकड़ा तथा छोड़ा। राजा इंद्रनील और हेमांगद को पराजित हुआ सुनकर अन्य मंडलेश्वर नरेश अपने यहाँ आने पर भी उस घोड़े को पकड़ने का साहस न कर सके। नृपश्रेष्ठ ! बहुत से वीर विहीन देशों का अवलोकन करके वह श्रेष्ठ घोड़ा स्वेच्छा से घूमता हुआ स्त्री राज्य में जा पहुँचा। वहाँ कोई सुरूपा नाम वाली सुंदरी राजकन्या राज्य करती थी। कहते हैं, वहाँ कोई पुरुष राजा जीवित नहीं रहता। वज्रनाभ ! उस देश में किसी स्त्री को पाकर जो काम भाव से उसका सेवन करता है, वह एक वर्ष के बाद कदापि जीवित नहीं रहता। स्त्री राज्य के नगर में फूलों से भरा हुआ एक सुंदर उद्यान था, जहाँ लवंग लताएँ फैली थीं और कुछ इलायची की सुगंध भीनी...