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07. विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 15 || उड्डीश-डामर देश के राजा, वंगदश के अधिपति वीर धन्‍वा तथा असम के नरेश पुण्‍ड्र पर यादव-सेना की विजय

07. विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 15 ||  उड्डीश-डामर देश के राजा, वंगदश के अधिपति वीर धन्‍वा तथा असम के नरेश पुण्‍ड्र पर यादव-सेना की विजय श्रीनारदजी कहते हैं-  राजन्! दिग्विजय के बहाने भूभार-हरण करने वाले साक्षात भगवान प्रद्युम्न अंगदेश को गये। अंगदेश का स्वामी केवल अन्‍त:पुर का अधिपति होकर वन में विहार करता था। वहाँ यादवों ने उसे जा पकड़ा तब उसने महात्‍मा प्रद्युम्न को पर्याप्‍त भेंट दी । उड्डीश-डामर (उड़ीसा) देश के राजा महाबली बृहदबाहु ने प्रद्युम्न को भेंट नहीं दी। वह अपने बल के अभिमान से मत्त रहता था। प्रद्युम्न ने जाम्‍बवती-कुमार वीरवर साम्‍ब को उसे वश में करने के लिये भेजा। साम्‍ब सूर्यतुल्‍य तेजस्‍वी रथ पर आरुढ़ हो, धनुष हाथ में ले अकेले ही गये। नरेश्‍वर उन्‍होंने बाण-समूहों से डामर नगर को उसी प्रकार आच्‍छादित कर दिया, जैसे मेघ तुषार राशि से किसी पर्वत को चारों से ढक देता है। इस प्रकार धर्षित एवं पराजित हेकर डामराधीश ने तत्‍काल हाथ जोड़ लिये और महात्‍मा प्रद्युम्न को नमस्‍कार करके भेंट अर्पित की । तत्‍पश्चात् वंगदश के अधिपति मदमत्त एवं वीर राज वीरधन्‍वा एक अक्षौहि...