02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 20 || श्रीराधा और श्रीकृष्ण के परस्पर श्रृंगार-धारण, रास, जलविहार एवं वनविहार का वर्णन
श्री गर्ग संहिता 02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 20 || श्रीराधा और श्रीकृष्ण के परस्पर श्रृंगार-धारण, रास, जलविहार एवं वनविहार का वर्णन श्री नारद जी कहते हैं:- राजन, तदनंतर मनोहर श्यामसुन्दर श्रीहरि जलक्रीड़ा समाप्त करके समस्त गोपांगनाओं के साथ गोवर्धन पर्वत को गये। उस पर्वत की कन्दरा में रत्नमयी रासेश्वरी श्रीराधा के साथ साक्षात श्रीहरि ने रासनृत्य किया। वहाँ पुष्पों से सुसज्जित रम्य सिंहासन पर दोनों प्रिया-प्रियतम श्रीराधा-माधव विराजमान हुए, मानो किसी पर्वत पर विद्युत-सुन्दरी और श्याम-घन एक साथ सुशोभित हो रहे हों। वहाँ सब सखियों ने बड़ी प्रसन्नता के साथ स्वामिनी श्रीराधा का श्रृंगार किया। चन्दन, केसर, कस्तूरी आदि से तथा महावर, इत्र, अरगजा और काजल तथा सुगन्धित पुष्प-रसों से कीर्तिकुमारी श्रीराधा की विधिपूर्वक अर्चना करके साक्षात श्रीयमुना ने उन्हें नूपुर धारण कराया। जहुनन्दिनी गंगा ने मंजीर नामक दिव्य भूषण अर्पित किया, श्रीरमा ने कटि प्रदेश में किंकिणी-जाल पहिनाया। श्रीमधुमाधवी ने कण्ठ में हार अर्पित किया, विरजा ने कोटि चन्द्रमाओं के समान उज्जवल एवं सुन्...