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04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 20 || बलदेवजी के हाथ से प्रलम्‍बासुर का वध तथा उसके पूर्वजन्‍म का परिचय

श्री गर्ग संहिता 04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 20 || बलदेवजी के हाथ से प्रलम्‍बासुर का वध तथा उसके पूर्वजन्‍म का परिचय श्रीनारदजी से राजा बहुलाश्व बोले:- ब्रह्मन, मैंने आपके मुख से गोपियों के चरित्र का उत्‍तम वर्णन सुना, साथ ही यमुना के पंचांग का भी श्रवण किया, जो बडे़-बडे़ पातको का नाश करने वाला है।  साक्षात गोलोक के अधिपति भगवान श्रीकृष्‍ण ने बलरामजी के साथ व्रजमण्‍डल आगे कौन-कौन-सी मनोहर लीलाएँ कीं यह बताइये।  श्रीनारदजी ने कहा:- राजन् एक दिन श्रीबलराम और ग्‍वाल-बालों के साथ अपनी गौएँ चराते हुए श्रीकृष्‍ण भाण्‍डीर वन में यमुनाजी के तट पर बालोचित खेल खेलने लगे।  बालकों से वाहृा-वाहन का खेल करवाते हुए श्रीकृष्‍ण मनोहर गौओं की देख-भाल करते हुए वन में विहार करते थे। (इस खेल में कुछ लड़के वाहन-घोड़ा आदि बनते और कुछ उनकी पीठ पर सवारी करते थे।)  उस समय वहाँ कंस का भेजा हुआ असुर प्रलम्‍ब गोपरूप धारण करके आया, दूसरे ग्‍वाल-बाल तो उसे न पहचान सके, किंतु भगवान श्रीकृष्‍ण से उसकी माया छिपी न रही। खेल में हारने वाला बालक जीतने वाले को पीठ पर चढ़ाता था, किंतु जब बलरामजी जीत गये, ...