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04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 19 || श्री यमुना-सहस्‍त्रनाम महात्मय

श्री गर्ग संहिता 04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 19 || श्री यमुना-सहस्‍त्रनाम महात्मय मांधाता बोले:- मुनिश्रेष्ठ, यमुनाजी का सहस्‍त्र नाम समस्‍त सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला उत्तम साधन है, आप मुझे उसका उपदेश कीजिये, क्‍योंकि आप सर्वज्ञ और निरामय (रोग-शोक से रहित) हैं। सौभरि ने कहा:- मांधाता नरेश, मै तुमसे ’कालिन्दी सहस्त्रनाम’ का वर्णन करता हूँ, वह समस्त सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला दिव्‍य तथा श्रीकृष्‍ण को वशीभूत करने वाला है। विनियोगः ॥ अस्य श्रीकालिन्दीसहस्रनामस्तोत्रमन्त्रस्य सौभरिरृषिः ।   श्रीयमुना देवता । अनुष्टुप् छन्दः । मायाबीजमिति कीलकम् ।   रमाबीजमिति शक्तिः । श्री कालिन्दनन्दिनीप्रसादसिद्ध्यर्थे पाठे   विनियोगः । उक्‍त वाक्‍य पढकर सहस्‍त्रनाम-पाठ के लिये विनियोग का जल छोडे़ :- ध्‍यान:- श्‍यामामम्‍भोजनेत्रां सघनघनरुचिं रत्‍नमञ्जीरकूजत्। कांचीकेयूरयुक्तां कनकमणिमये बिभ्रतिं कुण्‍डले द्वे॥ भ्राजच्‍छरीनीलवस्‍त्र स्‍फुरदिभजचलद्धाभारां मनोज्ञां। ध्‍याये मार्तण्‍डपुत्रीं तनुकिरणचयोद्दीप्‍तदीपाभिरामाम्॥ जो श्यामा (श्‍यामावर्ण एवं षोडश वर्ष की अवस्था वाली) है, जि...