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08. बलभद्र खण्‍ड‎ || अध्याय 11 || श्री बलराम-स्‍तोत्र

08. बलभद्र खण्‍ड‎ || अध्याय 11 || श्री बलराम-स्‍तोत्र दुर्योधन ने कहा- महामुनि प्राडविपाक जी ! अब भगवान श्रीबलरामजी का वह स्‍तोत्र, जो साक्षात समस्‍त सिद्धियों को प्रदान करने वाला है, कृपापूर्वक मुझसे कहिये।  प्राडविपाक मुनि बोले- राजन् ! बलरामजी का स्‍तोत्र श्रीवेदव्‍यासजी के द्वारा प्रणीत है, यह मनुष्‍यों को समस्‍त सिद्धियों और मोक्ष भी प्रदान करने वाला है। इस शुभ स्‍तवराज को तुम सुनो। ‘’देवादिदेव ! भगवन् ! कामपाल ! आपको नमस्‍कार ! हे बलराम जी ! आप साक्षात अनन्‍त और शेषजी हैं, आपको नमस्‍कार ! आप पृथ्‍वी को धारण करने वाले परिपूर्ण ब्रह्म, स्‍वयं प्रकाशमान, हाथ में हल लिये हुए, हजार मस्‍तकों से युक्त संकर्षण हैं। आपको नित्‍य मेरे नमस्‍कार हैं। पुरुष श्रेष्‍ठ बलरामजी। आप भगवान अच्‍युत के बड़े भाई हैं, रेवती के स्‍वामी हैं, हल आपका शस्‍त्र है और आप प्रलम्‍बासुर का संहार करने वाले हैं। [ 1 ] आप मेरी रक्षा करें। भगवान बलराम, बलभद्र और ताल ध्‍वज को मेरे बार-बार नमस्‍कार है। आप गौरवर्ण हैं, नीलाम्‍बर धारण किये हुए हैं, रोहिणी के कुमार है; आपको नमस्‍कार। आप धेनुकासुर, मुष्टिकासुर, कूट, ब...