02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 08 || ब्रह्माजी के द्वारा श्रीकृष्ण के सर्वव्यापी विश्वात्मा स्वरूप का दर्शन
श्री गर्ग संहिता 02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 08 || ब्रह्माजी के द्वारा श्रीकृष्ण के सर्वव्यापी विश्वात्मा स्वरूप का दर्शन जिस समय व्रजवासी बालकों के साथ श्रीकृष्ण यमुना तट पर रूचि पूर्वक भोजन कर रहे थे, उसी समय पध्मयोनी ब्रह्मा जी अघासुर की मुक्ति देखकर उसी स्थान पर पहुँच गये। इस दृश्य को देखकर ब्रह्माजी मन ही मन कहने लगे:- ‘ये तो देवाधिदेव श्री हरि नहीं हैं, अपितु कोई गोपकुमार हैं। यदि ये श्रीहरि होते तो गोप-बालकों के साथ इतने अपवित्र अन्न का भोजन कैसे करते?’ ब्रह्मा जी परमात्मा की माया से मोहित होकर बोल गये, उन्होंने उनकी (भगवान की) मनोज्ञ महिमा को जानने का निश्च्य किया। ब्रह्माजी स्वयं आकाश में अवस्थित थे, इसके उपरांत अघासुर-उद्धार की लीला के दर्शन से चकित होकर समस्त गायों-बछड़ों तथा गोप-बालकों का हरण करके वे अंतर्धान हो गये। श्री नारद जी कहते हैं:- श्रीकृष्ण गोवत्सों को न पाकर यमुना किनारे आये, परंतु वहाँ गोप-बालक भी नहीं दिखायी दिये। बछड़ों और वत्सपालों-दोनों को ढूँढ़ते समय उनके मन में आया कि ‘यह तो ब्रह्माजी का कार्य है। तदनंतर अखिल विश्वविधायक श्रीकृष्ण ने...