02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 19 ||रासक्रीड़ा का वर्णन...
श्री गर्ग संहिता 02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 19 ||रासक्रीड़ा का वर्णन... राजा बहुलाश्व ने पूछा: - देवर्षे, श्रीराधा को दर्शन दे, उसके प्रेम की परीक्षा करके, भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाशक्ति के द्वारा आगे चलकर कौन-सी लीला प्रकट की? श्री नारद जी ने कहा:- राजन, माधव (वैशाख) मास में माधवी लताओं से व्याप्त वृन्दावन में रासेश्वर माधव ने स्वयं रास का आरम्भ किया। वैशाख मास की कृष्णपक्षीया पंचमी को जब सुन्दर चन्द्रोदय हुआ, उस समय मनोहर श्याम सुन्दर ने यमुना के तटवर्ती उपवन में रासेश्वरी श्रीराधा के साथ रास-विहार किया। मिथिलेश्वर, इसके पूर्व गोलोक से जिस भूमिका पृथ्वी पर अवतरण हो चुका था, वह सब-की-सब तत्काल सुवर्ण तथा पद्भरागमणि से मण्डित हो गयी। वृन्दावन भी दिव्यरूप धारण करके, कामपूरक कल्पवृक्षों तथा माधवी लताओं से समंलकृत हो, अपनी शोभा से नन्दनवन को भी तिरस्कृत करने लगा। राजन, रत्नों के सोपानों और सुवर्ण-निर्मित तोलिकाओं (गुमटियों) से मण्डित तथा हंसों और कमल आदि के पुष्पों से व्याप्त यमुना नदी की अपूर्व शोभा हो रही थी। गिरिराज गोवर्धन गजराज के समान शोभा पाता था। जैसे गजराज के गण्ड स्थल ...