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05. मथुराखण्‍ड || अध्याय 16 || उद्धव द्वारा श्रीराधा तथा गोपीजनों को आश्वासन

गर्ग संहिता मथुराखण्‍ड : अध्याय 16  उद्धव द्वारा श्रीराधा तथा गोपीजनों को आश्वासन श्रीनारदजी कहते है– राजन् ! श्रीराधा ने पत्र लेकर उसे अपने मस्‍तक पर रखा, फिर नेत्रों और छाती से लगाया। तदनन्‍तर उसे पढ़कर श्रीकृष्‍ण के चरणाविन्‍दों का स्‍मरण करके, अत्‍यन्‍त प्रेमातुर हो नेत्रों से अश्रुधारा बहाती हुई वे उद्धव के सामने ही मूर्च्‍छा की पराकाष्‍ठा को पहुँच गयीं। तब सखियों ने उनके ऊपर केसर, अगुरु और चन्‍दन से मिश्रित जल तथा पुष्‍प रस छिड़क कर चँवर डुलाना आरम्‍भ किया। इससे पुन: उनकी चैतना लौटी। कमललोचना श्रीराधा को वियोग-दु:ख के सागर में डूबी हुई देख उद्धव तथा गोपियाँ नेत्रों से अविरल अश्रुधारा बहाने लगीं। राजन् ! उन सबके आँसूओं के प्रवाह से तत्‍काल वृन्‍दावन में कल्हार- पुष्‍पों से सुशोभित लीला-सरोवर प्रकट हो गया। नरेश्वर ! जो मुनष्‍य उस सरोवर का दर्शन, उसके जल का पान तथा उसमें भलीभाँति स्‍नान करके इस कथा को सुनता है, वह कर्मों के बन्‍धन से मुक्‍त हो श्रीकृष्‍ण को प्राप्‍त कर लेता है। तदनन्‍तर उद्धव के मुख से श्रीकृष्‍ण के पुनरागमन समाचार सुनकर वे सब गोपांग्‍नाएँ महात्‍मा गोविन्‍द का स...