05. मथुराखण्ड || अध्याय 08 || चाणूर-मुष्टिक आदि मल्लों का तथा कंस और उसके भाइयों का वध
गर्ग संहिता मथुराखण्ड : अध्याय 8 चाणूर-मुष्टिक आदि मल्लों का तथा कंस और उसके भाइयों का वध श्रीनारदजी कहते हैं- राजन् ! नन्दराज का चित्त करूणा से द्रवित हो रहा था। उनकी ओर ध्यान देकर वनिताओं मनोरथ को याद करके श्रीहरि शत्रुओं को मार डालने का संकल्प मन में लेकर बलपूर्वक युद्ध आरम्भ किया। चाणूर को भुजदण्डों से उठाकर श्रीकृष्ण ने बलपूर्वक अकस्मात आकाश में उसी प्रकार फेंक दिया, जैसे हवा ने उखडे़ हुए कमल को सहसा उड़ा दिया हो। आकाश से नीचे मुँह किये वह पृथ्वी पर इतने वेग से गिरा, मानों कोई तारा टूट पड़ा हो। फिर उठकर चाणूर ने श्रीकृष्ण को जोर से एक मुक्का मारा। उसके मुक्के की मार से परात्पर भगवान श्रीकृष्ण विचलित नहीं हुए। उन्होंने तत्काल चाणूर को उठाकर पृथ्वी पर पटक दिया। चाणूर के दाँत टूट गये। वह मदोन्मत मल्ल क्रोध से तमतमा उठा। मैथिल ! उसने श्रीकृष्ण की छाती पर दोनों हाथों से मुक्के मारे। नरेश्वर ! तब दोनों हाथो से उसके दोनों हाथ पकड़कर साक्षात भगवान श्रीकृष्ण ने कंस के आगे उसे घुमाना आरम्भ किया और सबके देखते-देखते पृथ्वी पर उसी प्रकार दे मारा, जैसे किसी बालक ने कमण...