07. विश्वजित खण्ड || अध्याय 23 || यादव-सेना का बाणासुर से भेंट लेकर अलकापुरी को प्रस्थान तथा यादवों और यक्षों का युद्ध
07. विश्वजित खण्ड || अध्याय 23 || यादव-सेना का बाणासुर से भेंट लेकर अलकापुरी को प्रस्थान तथा यादवों और यक्षों का युद्ध नारदजी कहते हैं- राजन् ! नदों, नदियों और समुद्रों ने भी सेना सहित महात्मा प्रद्युम्न को उनके तेज से धर्षित हो रथ निकलने के लिये मार्ग दे दिया। कैलास पर्वत के पार्श्वभाग बाणासुर का निवास स्थान शोणितपुर था। वहाँ श्रेष्ठ मानव-वीर यादवेश्वर प्रद्युम्न गये। यदुवंशियों को पुन: आया देख, बाणासुर को बड़ा क्रोध हुआ। उसने बारह अक्षौहिणी सेना के द्वारा उनके साथ युद्ध करने का विचार किया। इसी समय त्रिशूलधारी साक्षात पुराण पुरुष महेश्वरदेव नन्दी वृषभ पर आरुढ़ हो हिमाचल पुत्री उमा के साथ बाणासुर के पास आये और बोले। शिव ने कहा- असुरराज ! साक्षात परिपूर्णतम भगवान श्रीकृष्ण स्वयं असंख्य ब्रह्माण्डों के अधिपति, गोलोक के स्वामी तथा परात्पर परमात्मा हैं। हम तीनों- बह्मा, विष्णु और शिव-उन्हीं की कला हैं और उनकी आज्ञा को सदा अपने मस्तक पर धारण करते है; फिर तुम जैसे सामान्य कोटि के जीवों की तो बात ही क्या। उन्हीं के पौत्र अनिरुद्ध को तुमने ...