10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 23 || अनिरुद्ध के पूछने पर सान्दीपनि द्वारा श्री कृष्ण–तत्त्व का निरूपण, श्रीकृष्ण की परब्रह्मता एवं भजनीयता का प्रतिपादन करके जगत से वैराग्य और भगवान के भजन का उपदेश
10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 23 || अनिरुद्ध के पूछने पर सान्दीपनि द्वारा श्री कृष्ण–तत्त्व का निरूपण, श्रीकृष्ण की परब्रह्मता एवं भजनीयता का प्रतिपादन करके जगत से वैराग्य और भगवान के भजन का उपदेश श्रीगर्गजी कहते हैं- राजन ! तत्पश्चात् वहाँ श्रीकृष्ण पौत्र अनिरुद्ध ने मन में कुछ संदेह लेकर सान्दीपनि मुनि से उसी प्रकार प्रश्न किया, जैसे देवराज इंद्र देवगुरु बृहस्पति से अपने मन का संदेह पूछा करते थे। अनिरुद्ध बोले- भगवन् ! मुने ! मुझे उस सारतत्त्व का उपदेश दीजिए, जिससे मैं जगत के स्वप्नतुल्य सुखों को त्याग कर नित्यानंद स्वरूप में रमण करूँ। राजन् ! अनिरुद्ध के इस प्रकार पूछने पर सान्दीपनि मुनि हंसते हुए उसी प्रकार उन्हें उपदेश देने लगे, जैसे पूर्वकाल में राजा पृथु के पूछने पर सनत्कुमार ने उन्हें प्रसन्नतापूर्वक उपदेश दिया था। सान्दीपनि बोले– लोकेश ! तुम्हीं श्रीहरि के नाभि कमल से उत्पन्न हुए आदिदेव हो, अत: तुम्हारे सामने मैं सार तत्त्व की बात क्या कह सकूँगा। राजन् ! तथापि तुम्हारे वचन का गौरव मान कर समस्त दीन चेता मनुष्यों के कल्याण के लिए कुछ कहूँगा। नरेश्वर ! तुमने जो कुछ पूछा है,...