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08. बलभद्र खण्‍ड‎ || अध्याय 01 || श्री बलभद्र जी के अवतार का कारण

08. बलभद्र खण्‍ड‎ || अध्याय 01 || श्री बलभद्र जी के अवतार का कारण राजा बहुलाश्व ने कहा- ब्रह्मन ! आपके श्रीमुख से मैंने अमृत की उपेक्षा भी परम मधुर, मंगलमय, परम अद्भुत विश्वजितखण्‍ड का श्रवण किया। महात्‍मा श्रीकृष्‍ण परिपूर्णतम भगवान हैं, उनकी सोलह हजार पत्नियों में से प्रत्‍येक के दस-दस पुत्र हुए। मुनिवर ! उनके फिर करोड़ों पुत्र और पौत्र उत्‍पन्न हुए। पृथ्‍वी के रजकण गिने जा सकते हैं, किंतु कोई विद्वान कवि भी श्रीकृष्‍ण के वंशजों की गणना करने में समर्थ नहीं है। महात्‍मा बलरामजी की रेवती पत्नी थीं। उनके एक भी पुत्र नहीं हुआ। कृपापूर्वक इसका रहस्‍य बताइये। श्री नारद जी कहने लगे- तुम्‍हारा प्रश्न बहुत सुन्‍दर है। भगवान अच्‍युत के बड़े भाई भगवान संकर्षण कामपाल हैं। उन बलरामजी की कथा मैं तुम्‍हारे सामने भली-भाँति वर्णन करूँगा। दुर्योधन के गुरु प्राडविपाक नामक मुनि योगियों के और मुनियों के अधीश्वर थे। वे एक दिन हस्तिनापुर पधारे। दुर्योधन ने महान आदर के साथ उनका विविध उपचारों के द्वारा सम्‍यक प्रकार से पूजन किया। फिर वे महामूल्‍यवान सिंहासन पर विराजित हुए। दुर्योधन उनकी वन्‍दना और प्रदक्षिण...