05. मथुराखण्ड || अध्याय 23 || श्री कृष्ण का व्रज से लौटकर मथुरा में आगमन
गर्ग संहिता मथुराखण्ड : अध्याय 23 श्री कृष्ण का व्रज से लौटकर मथुरा में आगमन श्रीनारदजी कहते हैं- राजन् ! साक्षात भगवान श्रीकृष्ण व्रज में कई दिनों तक सबको अपना दर्शन दे मथुरा जाने को उद्यत हुए। नौ नन्दों, नौ उपनन्दों, छः वृषभानुओं तथा वृषभानुवर और व्रजेश्रर नन्दराज से मिलकर कलावती, यशोदा , अन्यान्य गोपियों तथा गौओं के गणों से भी भेंट करके, आश्वासन और ज्ञान दे, सबसे विदा लेकर माधव चंचल अश्वों से जुते हुए अपने दिव्य रथ पर आरूढ़ हो मथुरा जाने की इच्छा से नन्दगाँव से बाहर निकले। उनके पीछे-पीछे समस्त मोहित व्रजवासी बहुत दूर तक गये। वे माधव-के अत्यन्त कष्टमय विरह को नहीं सह सके। जिन्हें भूमण्डल पर कभी एक बार भी श्रीविष्णु का दर्शन हुआ हो, उन्हें भी उनका विरह दुस्सह हो जाता हैं, फिर जिन्हें प्रतिदिन उनका दर्शन होता रहा हो, उनको उनके विरह से कितना दुःख होता होगा, इसका वर्णन कैसे किया जा सकता है। नरेश्वर ! अपलक नेत्रों से श्रीधर के मुँह की ओर देखते हुए समस्त व्रजवासी गोप स्नेह-सम्बन्ध के कारण प्रेमविह्वल हो उनसे बोले। गोपों ने कहा- श्री...