05. मथुराखण्ड || अध्याय 24 || बलदेव जी द्वारा कोल दैत्य का वध; उनकी गंगा तटवर्ती तीर्थों में यात्रा;
गर्ग संहिता मथुराखण्ड : अध्याय 24 बलदेव जी द्वारा कोल दैत्य का वध; उनकी गंगा तटवर्ती तीर्थों में यात्रा; माण्डूक देव को वरदान और भावी वृत्तान्त की सूचना देना; फिर गंगा के अन्यान्य तीर्थों में स्नान-दान करके मथुरा में लौट जाना बहुलाश्व ने पूछा- मुने ! गोपांग्नाओं और गोपों को उत्तम दर्शन देकर मथुरा में लौटने के पश्चात श्रीकृष्ण तथा बलराम ने क्या किया ? श्रीकृष्ण और बलदेव का चरित्र बड़ा मधुर है। यह समस्त पापों को हर लेने वाला पुण्यप्रद तथा चतुर्वर्गरू फल प्रदान करने वाला है। श्रीनारदजी ने कहा- राजन् ! अब श्रीकृष्ण और बलदेवजी का दूसरा चरित्र सुनो जो सर्वपापहारी, पुण्यदायक तथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है। नरेश्वर ! कोल नामक दैत्य से पीड़ित हुए बहुत-से लोग दीनचित्त हो ब्राह्मणों के साथ कौशारविपुर से मथुरा में आये। उस समय रोहिणी नन्दन बलराम शीघ्रगामी अश्व पर पर आरूढ हो थोडे़-से अग्रगामी लोगों के साथ शिकार खेलने के लिये मथुरा से निकले थे। मार्ग में ही उन्हें प्रणाम करके उ...