02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 14 || कालिय का गरुड़ के भय से बचने के लिये यमुना-जल में निवास का रहस्य
गर्ग संहिता वृन्दावन खण्ड : अध्याय 14 कालिय का गरुड़ के भय से बचने के लिये यमुना-जल में निवास का रहस्य राजा बहुलाश्व ने पूछा - ब्रह्मन ! रमणक द्वीप में रहने वाले अन्य सर्पों को छोड़कर केवल कालियनाग को ही गरूड़ से भय क्यों हुआ ? यह सारी बात आप मुझे बताइये । श्री नारद जी ने कहा - राजन ! रमणक द्वीप में नागों का विनाश करने वाले गरुड़ प्रतिदिन जाकर बहुत-से नागों का संहार करते थे। अत: एक दिन भय से व्याकुल हुए वहाँ के सर्पों ने उस द्वीप में पहुँचे हुए क्षुब्ध गरुड़ से इस प्रकार कहा। नाग बोले - हे गुरुत्मन ! तुम्हें नमस्कार है। तुम साक्षात भगवान विष्णु के वाहन हो। जब इस प्रकार हम सर्पों को खाते रहोगे तो हमारा जीवन कैसे सुरक्षित रहेगा। इसलिये प्रत्येक मास में एक बार पृथक-पृथक एक-एक घर से एक सर्प की बलि ले लिया करो। उसके साथ वनस्पति तथा अमृत के समान मधुर अन्न की सेवा भी प्रस्तुत की जायगी। यह सब विधान के अनुसार तुम शीघ्र स्वीकार करो । गरूड़ जी बोले-आप लोग एक-एक घर से एक-एक नाग की बलि प्रतिदिन दिया करें; अन्यथा सर्प के बिना दूसरी वस्तुओं की...