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10. अश्‍वमेध खण्‍ड || अध्याय 30 || उर्ध्वकेश और अनिरुद्ध का तथा नद और गद का घोर युद्ध, उर्ध्वकेश और नद का वध

10. अश्‍वमेध खण्‍ड || अध्याय 30 || उर्ध्वकेश और अनिरुद्ध का तथा नद और गद का घोर युद्ध, उर्ध्वकेश और नद का वध श्रीगर्ग कहते हैं– महाराज ! तब उर्ध्वकेश मूर्च्छा से उठकर, दूसरे रथ पर आरूढ़ हो ज्यों ही अनिरुद्ध के सामने संग्राम के लिए आया, त्यों ही उन्होंने अपने तीखे नाराचों से उसके रथ के टुकड़े–टुकड़े कर डाले। नरेश्वर ! रथ को टूटा देख उसने पुन: दूसरे रथ का आश्रय लिया। परंतु प्रद्युम्न कुमार ने रणभूमि में तत्काल ही बाण मारकर उसके उस रथ को खण्डित कर दिया। इस प्रकार समरांगण में उर्ध्वकेश के नौ रथ अनिरुद्ध के द्वारा तोड़े गए । तब उस दैत्य ने कुपित होकर रणक्षेत्र में अनिरुद्ध पर तीव्रगति से शक्ति का प्रहार किया। उस शक्ति को अपने ऊपर आती देख वीर अनिरुद्ध ने अनेक नाराचों से उसके दस टुकड़े कर डाले। तब युद्धस्थल में सुवर्ण मय रथ पर आरूढ़ हो ऊर्ध्वकेश अनिरुद्ध का सामना करने के लिए बड़े वेग से आया। आते ही हर्षोत्साह से भरकर उसने अनिरुद्ध को पाँच बाणों से घायल कर दिया। उन बाणों के आघात से अनिरुद्ध को बड़ी वेदना हुई। तब कुपित हुए अनिरुद्ध ने धनुष उठाकर सहसा हाथ की फुर्ती दिखाते हुए ऊर्ध्वकेश की छाती म...