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05. मथुराखण्‍ड || अध्याय 09 || वसुदेव देवकी की बन्‍धन मुक्ति, श्रीकृष्‍ण-बलराम का विद्याध्‍ययन व गुरुदक्षिणा।

गर्ग संहिता मथुराखण्‍ड : अध्याय 9  श्रीकृष्‍णा द्वारा वसुदेव देवकी की बन्‍धन से मुक्ति, श्रीकृष्‍ण और बलराम का गुरुकुल में विद्याध्‍ययन तथा गुरुदक्षिणा के रूप में गुरु के मरे हुए पुत्र को यमलोक से लाकर लौटाना, श्रीक्रूर को हस्तिनापुर भेजना तथा कुब्‍जा का मनोरथ पूर्ण करना श्रीनारदजी कहते हैं- राजन् ! तदनन्‍तर भगवान श्रीकृष्‍ण और बलराम साक्षात वृष्णिवंशियों से घिरे हुए देवकी और वसुदेव के समीप गये। नरेश्वर ! अपने दोनों पुत्रों को देखकर उन दोनों के बन्‍धन उसी प्रकार स्‍वत: ढीले पड़ गये, जैसे गरुड़ को आया देख नागपाश के बन्‍धन स्‍वत: खुल जाते हैं। बलराम सहित श्रीहरि ने माता-पिता को अपने प्रभाव के ज्ञान से सम्‍पन्‍न देख तत्‍काल अपनी माया फैला दी, जो बलपूर्वक जगत् को मोह लेने वाली है। बलराम और कृष्‍ण मेरे पुत्र हैं, यह जानकर वसुदेवजी मोह से व्‍याकुल हो गये और आँसू बहाते हुए देवकी के साथ सहसा उठकर उन्‍होंने दोनों पुत्रों को हृदय से लगा लिया। तब वृष्णिवंशियों से घिरे हुए श्रीहरि ने उन दोनों को आश्वासन दे अपने नाना उग्रसेन को मथुरा का राजा बना दिया। कंस के भय से दूसरे देशों में भगे हुए यादवों...