08. बलभद्र खण्ड || अध्याय 02 || श्री बलभद्र जी के अवतार की तैयारी
08. बलभद्र खण्ड || अध्याय 02 || श्री बलभद्र जी के अवतार की तैयारी प्राडविपाक मुनि ने कहा- इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण के कहने पर हजार मुखवाले अनन्त जाने के लिये तैयार होकर अपनी सभा में जाकर विराजित हुए। उसी समय सिद्ध, चारण और गन्धर्वों ने आकर अत्यन्त विनीत भाव से सिर झुकाकर उन्हें सब ओर से नमस्कार किया। इसके बाद ताल के चिह से सुशोभित ध्वजा वाले दिव्य रथ में घोड़े जोतकर सुमति नामक सारथि उनके सम्मुख उपस्थित हुआ। शत्रु की सेना का विदारण करने वाला ‘मुसल’ दैत्यों का कचूमर निकालने वाला ‘हल’ और ब्रह्ममय नामक ‘कवच’ भी उनके सामने आकर उपस्थित हो गया। तदनन्तर वहाँ सब के देखते-देखते बलभद्रजी की सभा में श्रीशेषजी रमा वैकुण्ठ से पधारे। उनके एक सहस्त्रफनों पर मुकुट सुशोभित थे। सिद्ध चारणगण तथा पाणिनि और पतज्जलि आदि मुनि उनकी स्तुति कर रहे थे। ऐसे वे शेषजी आकर स्तुति करके संकर्षण के श्रीविग्रह में विलीन हो गये। उसके बाद अजित वैकुण्ठ से सहस्र वदन शेषजी का वहाँ शुभागमन हुआ। वे अजैकपाद, अहिर्बुध्रय, बहुरूप, महद् आदि रुद्रों से घिरे हुए थे। भयंकर प्रेत और विनायक आदि उ...