10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 16 || चम्पावतीपुरी के राजा द्वारा अश्व का पकड़ा जाना, यादवों के साथ हेमांगद के सैनिकों का घोर युद्ध, अनिरुद्ध और श्रीकृष्ण पुत्रों के शौर्य से पराजित राजा का उनकी शरण में आना
10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 16 || चम्पावतीपुरी के राजा द्वारा अश्व का पकड़ा जाना, यादवों के साथ हेमांगद के सैनिकों का घोर युद्ध, अनिरुद्ध और श्रीकृष्ण पुत्रों के शौर्य से पराजित राजा का उनकी शरण में आना श्रीगर्गजी कहते हैं– राजन ! वहाँ से छूटने पर वह अश्व सब देशों का अवलोकन करता हूँ उशीनर जनपद के अंतर्गत चम्पावतीपुरी जा पहुँचा। राजा हेमांगद से परिपालित वह पुरी विशाल दुर्ग से मंडित थी। उसके भीतर चारों वर्णों के लोग निवास करते थे। वह पुरी गगनचुम्बी प्रासादों से परिवेष्टित थी। वहाँ पुण्यात्मा राजा हेमांगद महान शूरवीरों से घिरे रह कर अपने पुत्र हंसकेतु के साथ राज्य करते थे। नरेश्वर ! उन्होंने यादवों की अवहेलना करके महात्मा अनिरुद्ध के उस अश्व को अनायास ही पकड़ लिया। मानद ! राजा हेमांगद सोने की जंजीर से घोड़े को बांध कर नगर के सभी दरवाजों में कपाट और अर्गला आदि दे दिए तथा यादवों के विनाश के लिए दुर्ग की दीवारों पर दो लाख शतघ्नियां (तोपें) लगवा दीं और युद्ध का ही निश्चय किया। तत्पश्चात् सेना सहित अनिरुद्ध घोड़े की राह देखते हुए वहाँ आ पहुँचे। उन्होंने चम्पावती के उपवन में डेरा डाल दिया। वह...