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07. विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 09 || भानु के द्वारा रंग-पिंग का वध; प्रद्युम्न और शिशुपाल का भयंकर युद्ध तथा चेदिदेश पर प्रद्युम्न की विजय

गर्ग संहिता  विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 09 ||  भानु के द्वारा रंग-पिंग का वध; प्रद्युम्न और शिशुपाल का भयंकर युद्ध तथा चेदिदेश पर प्रद्युम्न की विजय   श्रीनारदजी कहते हैं- राजन्! यों कहकर शत्रुसूदन भानु ढाल-तलवार लेकर पैदल ही शत्रुसेना में उसी प्रकार घुस गये, भानु ने अपने खड्ग से शत्रु-योद्धाओं की भुजाएं काट डालीं। हाथी और घोड़ों भी जब सामने या आस-पास मिल जाते थे, तब वे अपनी तलवार से उनके दो टुकड़े कर डालते थे। वे उस समरागंण में शत्रुओं का छेदन करते हुए अकेले ही विचरने और शोभा पाने लगे। उनका दूसरा साथी केवल खड्ग था। जैसे कुहा से और बादलों से आच्‍छादित होने पर भी सूर्य देव अपने तेज से उदासित होत हैं, उसी प्रकार शत्रुओं से आवृत होने पर भी वीरवर भानु अपने विशिष्‍ट तेज का परिचय दे रहे थे। मिथिलेश्‍वर ! भानु के खड्ग से जिनके कुम्‍भस्‍थल कट गये थे, उन हाथियों के मस्‍तकों में से मोती रणभूमि में उसी प्रकार गिरते थे, जैसे पुण्‍यकर्मों के क्षीण हो जाने पर स्‍वर्गवासी जनों के तारे द्युलोक से भूमि पर गिर पड़ते हैं। उस समारांगण में दृष्टिमात्र से शत्रुसेना को धराशा‍यिनी करके महाबली वीर ...