04. माधुर्य खण्ड || अध्याय 04 || कोसल प्रान्तीय स्त्रियों का व्रज में गोपी होकर श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भाव से प्रेम करना
श्री गर्ग संहिता 04. माधुर्य खण्ड || अध्याय 04 || कोसल प्रान्तीय स्त्रियों का व्रज में गोपी होकर श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भाव से प्रेम करना श्रीनारदजी कहते हैं:- मिथिलेश्वर, अब कोसल प्रदेश की गोपिकाओं का वर्णन सुनो, यह श्रीकृष्ण चरितामृत समस्त पापों का नाश करने वाला तथा पुण्य जनक है। कोसलप्रान्त की स्त्रियाँ श्रीराम के वर से व्रज में नौ उपनन्दों के घरों में उत्पन्न हुई और व्रज के गोपजनों के साथ उनका विवाह हो गया। वे सब की सब रत्नमय आभूषणों विभूषित थीं, उनकी अंग कान्ति पूर्ण चन्द्रमा की चाँदनी के समान थी। वे नूतन यौवन से सम्पन्न थी, उनकी चाल हंस के समान थी और नेत्र प्रफुल्ल कमलदल के समान विशाल थे। वे पद्यिनी जाति की नारियाँ थीं, उन्होनें कमनीय महात्मा नन्द-नन्दन श्रीकृष्ण के प्रति जारधर्म के अनुसार उत्तम, सुदृढ़ तथा सबसे अधिक स्नेह किया। व्रज की गलियों में माधव मुस्कराकर पीताम्बर छीनकर और आँचल खींचकर उनके साथ सदा हास परिहास किया करते थे। वे गोपबालाएँ जब दही बेचने के लिये निकलतीं तो 'दही लो, दही लो'- यह कहना भूलकर 'कृष्ण लो, कृष्ण ...