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07. विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 49 || राजसूय यज्ञ में ऋषियों, ब्राह्मणों, राजाओं, तीर्थों, क्षेत्रों, देवगणों तथा सुहृद् सम्‍बन्धियों का शुभागमन

07. विश्वजित खण्‍ड ||  अध्याय 49 || राजसूय यज्ञ में ऋषियों, ब्राह्मणों, राजाओं, तीर्थों, क्षेत्रों, देवगणों तथा सुहृद् सम्‍बन्धियों का शुभागमन बहुलाश्व ने पूछा- विप्रवर ! आप परावरवेत्ताओं में श्रेष्‍ठ हैं; अत: मुझे यह बताइये कि राजा उग्रसेन ने किस प्रकार राजसूययज्ञ का विधिपूर्वक अनुष्‍ठान किया ।। 1 ।। नारदजी ने कहा- राजन् ! तदनन्‍तर समस्‍त धर्मात्‍माओं में श्रेष्‍ठ राजा उग्रसेन ने भगवान श्रीकृष्‍ण की सहायता से क्रतुराज राजसूय का सम्‍पादन किया। यदुकुल के आचार्य गर्गजी से यत्नपूर्वक मुहूर्त पूछकर भाई बन्‍धुओं तथा सुहृदों को निमन्‍त्रण दिया। अत्‍यन्‍त भक्ति भाव से बुलाये जाने पर ऋषि, मुनि तथा ब्राह्मण सब लोग अपने पुत्रों और शिष्‍यों के साथ द्वारका में आये। राजन् ! साक्षात् वेदव्‍यास, पराशर, मैत्रेय, पैल, सुमन्‍तु, दुर्वासा, वैशम्‍पायन, जैमिनि, भार्गव परशुराम, दत्तात्रेय, असित, अंगिरा, वामदेव, अन्नि, वसिष्‍ठ, कण्‍व, विश्वामित्र, शतानन्‍द, भारद्वाज, गौतम, कपिल, सनकादि, विभाण्‍ड, पतंजलि, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, प्राडविपाक, मुनिश्रेष्‍ठ शाण्डिल्‍य तथा दूसरे-दूसरे मुनि वहाँ शिष्‍यों सहित प...