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11. गर्ग संहिता-माहात्‍म्‍य || अध्याय 04 || शाण्‍डिल्‍य मुनि का राजा प्रतिबाहु को गर्गसंहिता सुनाना; श्रीकृष्‍ण प्रकट होकर राजाको वरदान देना; राजाको पुत्र की प्राप्‍ति और संहिता का माहात्‍म्‍य

11. गर्ग संहिता-माहात्‍म्‍य || अध्याय 04 || शाण्‍डिल्‍य मुनि का राजा प्रतिबाहु को गर्गसंहिता सुनाना; श्रीकृष्‍ण प्रकट होकर राजाको वरदान देना; राजाको पुत्र की प्राप्‍ति और संहिता का माहात्‍म्‍य महादेवजी बोले - प्रिये ! मुनीश्‍वर शाण्‍डिल्‍य का यह कथन सुनकर राजा को बड़ी प्रसन्‍नता हुई। उसेन विनयावत होकर प्रार्थना की- ‘मुने ! मैं आपके शरणागत हूँ। आप शीघ्र ही मुझे श्रीहरि की कथा सुनाइये और पुत्रवान् बनाइये’।  राजा की प्रार्थना सुनकर मुनिवर शाण्‍डिल्‍य ने श्रीयमुनाजी के तट पर मण्‍डप का निर्माण करके सुखदायक कथा-परायण आयोजन किया। उसे सुनकर सभी मथुरावासी वहाँ आये ।महान ऐश्‍वर्यशाली यादवेन्‍द्र श्रीप्रतिबाहु कथारम्‍भ तथा कथा समाप्‍ति के दिन ब्राह्मणों को उत्‍तम भोजन कराया तथा बहुत-सा धन दान दिया। तत्‍पश्‍चात राजा ने मुनिवर शाण्‍डिल्‍य का भली-भाँति पूजन करके उन्‍हें रथ, अश्व, द्रव्‍यराशि, गौ, हाथी और ढेर-के-ढेर रत्‍न दक्षिणा में दिये। सर्वमंगले ! तब शाण्‍डिल्‍य ने मेरे द्वारा कहे हुए श्रीमान् गोपालकृष्‍ण के सहस्‍त्रनामका पाठ किया, जो सम्‍पूर्ण दोषों को हर लेने वाला है। कथा समाप्‍त होने पर शा...