07. विश्वजितखण्ड || अध्याय 03 ||प्रद्युम्न के नेतृत्व में दिग्विजय के लिये प्रस्थित हुई यादवों की गजसेना,
गर्ग संहिता विश्वजितखण्ड || अध्याय 03 || प्रद्युम्न के नेतृत्व में दिग्विजय के लिये प्रस्थित हुई यादवों की गजसेना, अश्वसेना तथा योद्धाओं का वर्णन श्रीनारदजी कहते हैं- राजन् ! तदनन्तर भगवान श्रीकृष्ण, राजा उग्रसेन, बलरामजी तथा गुरु गर्गाचार्य को नमस्कार करके, उनकी आज्ञा ले, प्रद्युम्न रथ पर आरुढ़ हो कुशस्थली पुरी से बाहर निकले। फिर उनके पीछे समस्त उद्धव आदि यादव, भोजवंशी, मधुवंशी, शूरवंशी और दशाहावंश में उत्पन्न वीर चले। फिर श्रीकृष्ण के भाई गद आदि सब वीर श्रीकृष्ण की अनुमति ले पुत्रों और सेनाओं के साथ चल दिये। साम्ब आदि महारथी भी प्रद्युम्न के साथ गये। वे सभी यादव-वीर किरीट, कुण्डल तथा लोहे के बने हुए कवच से अलंकृत थे। उनके साथ करोड़ों की संख्या में चतुरंगिणी सेना थी। वे सब द्वारकापुरी से बाहर निकले। उनके रथ मोर, हंस, गरुड़, मीन और ताल के चिंह से युक्त ध्वजों से सुशोभित थे, सूर्य मण्डल के समान तेजोमय थे और चंचल अश्व उन में जोते गये थे। उन रथों के कलश और शिखर सोने के बने थे, मोतियों की बन्दन वारें उनकी शोभा बढा़ती थीं। वे सभी रथ वायु वेग का अनुकरण करते थे।...