Posts

Showing posts with the label 08. बलभद्र खण्‍ड‎ || अध्याय 10 || श्रीबलभद्रजी की पूजा-पद्धति और पटल

08. बलभद्र खण्‍ड‎ || अध्याय 10 || श्रीबलभद्रजी की पूजा-पद्धति और पटल

08. बलभद्र खण्‍ड‎ || अध्याय 10 || श्रीबलभद्रजी की पूजा-पद्धति और पटल दुर्योधन ने कहा- भगवन् ! आप सर्वज्ञ हैं। यह बताने की कृपा कीजिये कि गोपियों के यूथ को श्रीगर्गाचार्यजी ने बलभद्र पंचाग किस प्रकार प्रदान किया था। प्राडविपाक मुनि बोले- कुरुराज ! एक बार गर्गजी यमुना स्‍न्नान करने के लिये गर्गाचल से चलकर व्रजपुर में पधारे। यमुनाजी की तट की ललित लताएँ पवन के प्रवाह से हिल रही थीं। पुष्‍पों के सौरभ से मत्त हुए भ्रमरों के समूह गुंजार कर रहे थे। इस प्रकार के यमुना तट पर निकुंज के नीचे एकान्‍त में श्रीगर्गाचार्य भगवान बलराम और श्रीकृष्‍ण का ध्‍यान करने लगे। उस समय गोपियों ने आकर उनको प्रणाम किया। उनको स्‍मरण हो आया कि हम पूर्वजन्‍म की नागेन्‍द्र कन्‍याएँ हैं। तब उन्‍होंने बलभद्रजी को प्राप्‍त करने के लिये गर्गजी सेवा का साधन पूछा। कन्‍याओं की इस अनुपम भक्ति को देखकर उनके उद्देश्‍य की सिद्धि के लिये गर्गजी ने उनको प‍द्धति, पटल, स्‍तोत्र, कवच और सहस्‍त्र नाम यह पंचांग साधन प्रदा किया। अब बताओ, तुम और क्‍या सुनना चाहते हो। दुर्योधन ने कहा- ब्रह्मन गुरुदेव ! आप भक्तवत्‍सल हैं, मैं आपको नमस्‍कार ...