05. मथुराखण्ड || अध्याय 14 उद्धव का श्रीकृष्ण-सखाओं को आश्वासन, नन्द और यशोदा से बातचीत तथा उनकी प्रेम-लक्षणा-भक्ति से चकित होकर उद्धव का उन्हें श्रीकृष्ण के चरित्र सुनाना
गर्ग संहिता मथुराखण्ड : अध्याय 14 उद्धव का श्रीकृष्ण-सखाओं को आश्वासन, नन्द और यशोदा से बातचीत तथा उनकी प्रेम-लक्षणा-भक्ति से चकित होकर उद्धव का उन्हें श्रीकृष्ण के चरित्र सुनाना श्रीनारदजी कहते है– राजन् ! इस प्रकार प्रेम भरे गोपों से, जो श्रीकृष्ण के विरह से व्याकुल थे, प्रेमी भक्त उद्धव ने विस्मय रहित होकर कहा । उद्धव बोले– व्रजवासियों ! मैं श्रीकृष्ण का दास हूँ– उनका प्रेमपात्र तथा एकान्त सेवक हूँ। श्रीहरि ने बड़ी उतावली के साथ आप लोगों का कुशल-मंगल जानने के लिये मुझे यहाँ भेजा है। यहाँ से मथुरापुरी को लौटकर श्रीहरि से आप लोगों की विरह वेदना निवेदित करके अपने नेत्रों के जल से उनके चरण पखारकर उन्हें प्रसन्न करूँगा और उन्हें साथ लेकर शीघ्र ही आप लोगों के समीप आउँगा– यह मेरी प्रतिज्ञा है, यह कभी झूठी नहीं होगी। गोपालगण ! आप लोग प्रसन्न हों, शोक न करें। आप इस व्रज में शीघ्र श्रीवल्लभ श्रीहरि का दर्शन करेंगे । नारदजी कहते हैं– राजन् ! इस प्रकार ग्वालों को आश्वासन दे, रथ पर बैठे हुए यदुनन्दन उद्धव श्रीदामा आदि गोपों के साथ हर्ष से भरकर नन्द गाँव प्रविष्ट हुए। उस स...