10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 59C || गर्गाचार्य के द्वारा राजा उग्रसेन के प्रति भगवान श्रीकृष्ण के सहस्रनामों का वर्णन (501 से 750 तक)
10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 59C || गर्गाचार्य के द्वारा राजा उग्रसेन के प्रति भगवान श्रीकृष्ण के सहस्रनामों का वर्णन भगवान श्रीकृष्ण के सहस्रनामों का वर्णन (501 से 750 तक) ५०१. बाणपुत्रीपतिः- बाणासुरकी कन्या ऊषाके स्वामी, ५०२. महासुन्दर:- अतिशय सौन्दर्य शाली, ५०३. कामपुत्रः प्रद्युम्नके पुत्र अनिरुद्धरूप, ५०४. बलीश:- बलवानोंके ईश्वर ॥ ६९ ॥ ५०५. महादैत्यसंग्रामकृद् यादवेशः- बड़े-बड़े दैत्योंके साथ युद्ध करनेवाले यादवोंके स्वामी, ५०६. पुरीभञ्जनः = बाणासुरकी नगरीको नष्ट-भ्रष्ट करनेवाले ५०७. भूतसंत्रासकारी भूतगणोंको संत्रस्त कर देनेवाले, ५०८. मृधे रुद्रजित् युद्धमें रुद्रको जीतनेवाले, ५०९. रुद्रमोही- जृम्भणास्त्रके प्रयोगसे रुद्रदेवको मोहित करनेवाले, ५१०. मृधार्थी = युद्धाभिलाषी, ५११. स्कन्दजित् कुमार कीर्तिकेयको परास्त करनेवाले ५१२. कूपकर्णप्रहारी 'कूपकर्ण' नामक प्रमथगणपर प्रहार करनेवाले ॥ ७० ॥ ५१३. धनुर्भञ्जनः धनुष भङ्ग करनेवाले, ५१४. बाणमानप्रहारी बाणास...