08. बलभद्र खण्ड || अध्याय 12 || श्री बलराम-कवच
08. बलभद्र खण्ड || अध्याय 12 || श्री बलराम-कवच दुर्योधन ने कहा- महामुने ! श्रीमान् गर्गाचार्य ने गोपियों को जो सब तरह से रक्षा करने वाले दिव्य कवच दिया था, आप उसे मुझ को प्रदान कीजिये। प्राडविपाक बोले - मनुष्य जल में स्न्नान करके रेशमी वस्त्र धारण करे, कुशासन पर बैठे और हाथ में कुश की पवित्री पहनकर मन्त्र का शोधन करे। तदनन्तर अच्युताग्रज भगवान बलरामजी का स्मरण करके उन्हें प्रणाम करे। फिर मन को एकाग्र करके मन्त्र रुपी कवच को धारण करे। जो भगवान गोलोक धाम के अधिपति हैं, जिनका कीर्तन परम पवित्र है, वे परमेश्वर शत्रुओं से मेरी रक्षा करें। जिनके मस्तक पर भूमण्डल सरसों की तरह प्रतीत होता है, वे भगवान भूमण्डल में मेरी रक्षा करें। हलधर भगवान सेना में और युद्ध में सदा मेरी रक्षा करें। मुसलधारी भगवान दुर्ग में और आदिदेव भगवान संकर्षण वन में मेरी रक्षा करें। यमुना के प्रवाह को रोकने वाला भगवान जल में और नीलाम्बरधारी भगवान अग्नि में निरन्तर मेरी रक्षा करें। भगवान राम वायु (आंधी) में मेरी रक्षा करें। शून्य (आकाश) में भगवान बलदेव और महान समुद्र में अनन्तवपु भगवान मेरी सदा रक्षा ...