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31.3 भजन || होरी होरी करे रे कान्हा, होरी का दिन आवन दे।

31.3 भजन || होरी होरी करे रे कान्हा, होरी का दिन आवन दे। भजन ||  होरी होरी करे रे कान्हा, होरी का दिन आवन दे। रंग गुलाल उड़े आंगन में, वो फागन तो आवन दे। वो फागन तो आवन दे। होरी है होरी पर मुझको, होरी तो कोई खेलने दो। गोरी गोरी राधा पर, रंग कोई तो लगावन दो। होरी है होरी पर मुझको, होरी तो कोई खेलने दो। होरी होरी करे रे कान्हा, होरी का दिन आवन दे। रंग गुलाल उड़े आंगन में, वो फागन तो आवन दे। वो फागन तो आवन दे। जो तूने की मो से हट खेली तो  तो बहियां पकड़ तुझे बिठा लूंगी। हरि से तुझे हरा बनाय दूंगी  इतना हरा रंग मैं डालूंगी हरा हरा नहीं कोई तुझे कहेगा  चुनरी ओढ़ा हरी बना दुंगी। नर से तोहे नारी बनाय क  बरसाने भर में घुमाई दूंगी। जो तूने की मो से हट खेली तो  तो बहियां पकड़ तुझे बिठा लूंगी। नन्द लाल से तुझे लाल बनाय दूं  इतना लाल रंग मैं डालूं तोपे तोकू लालम लाल बनाय दुंगी चुनरी ओढ़ा लल्ला से तोकू लल्ली सुंदर बनाय दुंगी। नर से तोहे नारी बनाय क  बरसाने भर में घुमाई दूंगी। जो तूने की मो से हट खेली तो  तो बहियां पकड़ तुझे बिठा लूंगी। कटि लहंगा गल म...