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04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 07 || राजा विमल का संदेश पाकर भगवान श्रीकृष्‍ण का उन्‍हें दर्शन और मोक्ष प्रदान करना तथा उनकी राजकुमारियों को साथ लेकर व्रजमण्‍डल में लौटना

श्री गर्ग संहिता 04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 07 || राजा विमल का संदेश पाकर भगवान श्रीकृष्‍ण का उन्‍हें दर्शन और मोक्ष प्रदान करना तथा उनकी राजकुमारियों को साथ लेकर व्रजमण्‍डल में लौटना.. श्रीनारदजी कहते हैं:- राजन, तदनन्‍तर दूत पुन: सिन्‍धुदेश से मथुरा-मण्‍डल में आया, वृन्‍दावन में विचरते हुए यमुना के तटपर उसको श्रीकृष्‍ण का दर्शन हुआ।  एकान्‍त में श्रीकृष्‍ण को प्रणाम करके दोनों हाथ जोडकर और उनकी परिक्रमा करके उसने धीरे-धीरे राजा विमल की कही हुई बात दुहरायी। दूत ने कहा:- "जो स्‍वयं परब्रह्म परमेश्वर हैं, सबसे परे और सबके द्वारा अदृश्‍य हैं, जो परिपूर्ण देव पुण्‍य की राशि से भी सदा दूर ऊपर उठे हुए हैं, तथापि संतजनों को प्रत्‍यक्ष दर्शन देने वाले हैं, उन भगवान श्रीकृष्‍ण को मेरा नमस्‍कार है।  गौ, ब्राह्मण, देवता, वेद, साधु पुरुष तथा धर्म की रक्षा के लिये जो अजन्‍मा होने पर भी इन दिनों कंसादि दैत्‍यों के वध के लिये युदकुल में उत्‍पन्‍न हुए हैं, उन अनन्‍त गुणों के महासागर आप श्रीहरि को मेरा नमस्‍कार है। अहो, व्रजवासियों का बहुत बड़ा सौभाग्‍य है, आपके पिता नन्‍दराज का कुल धन्‍य है...