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04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 02 || ऋषिरूपा गोपियों का उपाख्‍यान- वंगदेश के मंगल-गोप की कन्‍याओं का नन्‍दराज के व्रज में आगमन तथा यमुनाजी के तट पर रास मण्‍डल में प्रवेश

श्री गर्ग संहिता  04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 02 || ऋषिरूपा गोपियों का उपाख्‍यान- वंगदेश के मंगल-गोप की कन्‍याओं का नन्‍दराज के व्रज में आगमन तथा यमुनाजी के तट पर रास मण्‍डल में प्रवेश श्रीनारदजी कहते हैं:- मैथिल, अब तुम ऋषिरूपा गोपियों की कथा सुनो, वह सब पापों को हर लेने वाली, परम पावन तथा श्रीकृष्‍ण के प्रति भक्ति-भाव की वृद्धि करने वाली है।  वंगदेश में मंगल नाम से प्रसिद्ध एक महामनस्‍वी गोप था, जो लक्ष्‍मीवान, शास्‍त्र ज्ञान से सम्‍पन्‍न तथा नौ लाख गौओं का स्‍वामी था।  मिथिलेश्‍वर, उसके पाँच हजार पत्नियां थीं।  किसी समय दैव योग से उसका सार धन नष्‍ट हो गया, चोरों ने उसकी गौओं का अपहरण कर लिया। कुछ गौओं को उस देश के राजा ने बलपूर्वक अपने अधिकार में कर लिया।  इस प्रकार दीनता प्राप्‍त होने पर मंगल-गोप बहुत दु:खी हो गया।  उन्‍हीं दिनों श्रीरामचन्‍द्र जी के वरदान से स्त्रीभाव को प्राप्‍त हुए दण्‍डकारण्‍य के निवासी ऋषि उसकी मान्‍यताएँ हो गये। उस कन्‍या-समुह को देखकर दु:खी गोप मंगल ओर भी दु:ख में डूब गया और आधि-व्‍याधि से व्‍याकुल रहने लगो, उसने मन-ही-मन इस प्र...