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Showing posts from June, 2022

सफल जीवन के सात्विक नियम

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🙏🌹🌻सफल जीवन के सात्विक नियम 🌻🌹🙏               🌱  🌱🌱🍂🍂🍂🌱🌱🌱 सर्व सुखः शान्ति से जीवन जीने के  सनातन धर्म में ज्ञनियों द्वारा कुछ आवश्यक नियम मानव के लिये बनाये गये हैं , जिनका निजी जीवन मे पालन किया जाये तो मनुष्य अपने सतकर्म की बढोतरी करते हुए , निडरतापूर्वक , दृढ़ इच्छाशक्ति का पालन करते हुये अपना परलोक भी सुधार सकता है ;-  🌷घर के मुख्य प्रवेश द्वार को सफाई करके वन्दरवार -     रंगोली से सजाकर रखें  🌷 घर मे जाले ना लगें , लगातार सफाई करते रहें 🌷 घर मे प्रति दिन पूजाघर मे  २ समय की ज्योत        अवश्य  जलायें  🌷 शंखनाद एवं पूजा की घंटी अवश्य बजायें इससे     नकारात्मक प्रभाव दूर होकर सकारात्मकता आती है  🌷घर आंगन मे तुलसी का पौधा लगाकर जल से उचित      दिनों पर ही सींचे  🌷माँ लक्ष्मी की उपासना करें  🌷सूर्य को अधर्य (  जल  ) के साथ प्रणाम नित्य करें  🌷ब्राह्मणों को भोजन समय समय पर खिलायें  🌷एकादशी के द...

पशु पति नाथ मंदिर मे नंदी के दर्शन नही करना चाहिए,क्यों?

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पशु पति नाथ  नेपाल के  पशु पति नाथ मंदिर की अनोखी ➖ महिमा➖ 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ अगर आप कभी नेपाल घुमने जाते हैं तो आपको वहां जाकर इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं होगा कि आप एक अलग देश में हैं। कुछ भारत जैसी संस्कृति और संस्कारों को देखकर आप आश्चर्यचकित जरुर हो जायेंगे। आप अगर शिव भगवान के भक्त हैं तो आपको एक बार नेपाल स्थित भगवान शिव का पशुपतिनाथ मंदिर जरूर जाना चाहिए। नेपाल में भगवान शिव का पशुपतिनाथ मंदिर विश्वभर में विख्यात है। इसका असाधारण महत्त्व भारत के अमरनाथ व केदारनाथ से किसी भी प्रकार कम नहीं है। पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से तीन किलोमीटर उत्तर-पश्चिम देवपाटन गांव में बागमती नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव के पशुपति स्वरूप को समर्पित है। यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में शामिल भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर नेपाल में शिव का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। यह मंदिर हिन्दू धर्म के आठ सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। नेपाल में यह भगवान शिव का सबसे पवित्र मंदिर है। इस अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ के दर्शन के लिए भारत के ही...

भगवान विष्णु के चरणों का महत्व; श्री कृष्ण के चरणों में कौन से चिन्ह हैं ?

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* भगवान विष्णु के चरणों का महत्व * 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ किसी ने सही ही कहा है कि भगवान के पांव में स्वर्ग होता है। उनके चरणों जैसी पवित्र जगह और कोई नहीं है। इसलिए तो लोग भगवान के चरणों का स्पर्श पाकर अपने जीवन को सफल बनाने की होड़ में लगे रहते हैं।लेकिन भगवान के चरणों का इतना महत्व क्यों है क्या कभी आपने जाना है? भगवान के चरणरज की ऐसी महिमा है कि यदि इस मानव शरीर में त्रिभुवन के स्वामी भगवान विष्णु के चरणारविन्दों की धूलि लिपटी हो तो इसमें अगरू, चंदन या अन्य कोई सुगन्ध लगाने की जरूरत नहीं, भगवान के भक्तों की कीर्तिरूपी सुगन्ध तो स्वयं ही सर्वत्र फैल जाती है। संसार के पालहार व परम दयालु भगवान विष्णु सबमें व्याप्त हैं। शेषनाग की शय्या पर शयन कपने वाले व शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले भगवान विष्णु के चरण-कमल भूदेवी (भूमि) और श्रीदेवी (लक्ष्मी) के हृदय-मंदिर में हमेशा विराजित रहते हैं। भगवान के चरणों से निकली गंगा का जल दिन-रात लोगों के पापों को धोता रहता है। भगवान के चरणरज की ऐसी महिमा है कि यदि इस मानव शरीर में त्रिभुवन के स्वामी भगवान विष्णु के चरणारविन्दों की धूलि ...

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा एवं विधि

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा एवं विधि 〰️〰️🌸〰️〰️🌸🌸〰️〰️🌸〰️〰️ जन्माष्टमी का त्यौहार श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मथुरा नगरी में असुरराज कंस के कारागृह में देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को पैदा हुए। उनके जन्म के समय अर्धरात्रि (आधी रात) थी, चन्द्रमा उदय हो रहा था और उस समय रोहिणी नक्षत्र भी था। इसलिए इस दिन को प्रतिवर्ष कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत विधि 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 1.  इस व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारणा से व्रत की पूर्ति होती है। 2.  इस व्रत को करने वाले को चाहिए कि व्रत से एक दिन पूर्व (सप्तमी को) हल्का तथा सात्विक भोजन करें। रात्रि को स्त्री संग से वंचित रहें और सभी ओर से मन और इंद्रियों को काबू में रखें। 3.  उपवास वाले दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करके पूर्व या उत्तर को मुख करके बैठें। 4. मध्याह्न के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए 'सूतिकागृह' नियत करें। तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की...

गौ

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🙏🙏🙏🙏 गौ 1-हर व्यक्ति जन्म लेता है गो-पुत्र के रूप में-इसलिये उसका एक गोत्र होता है। 2-हर व्यक्ति अपना विवाह मुहूर्त चाहता है -गो धूलि बेला में। 3-हर व्यक्ति मृत्यु के बाद जाना चाहता है गोलोक धाम,हर  आत्मा चाहती है गोलोकवास। 4-हर जीव वैतरणी पार करना चाहता है -मृत्यु से पहले गो दान करके।            सोचिये ! हर कामना पूरी करने के लिए गो माता का सहारा। लेकिन उसी गो माता की सेवा के लिए समय नही होता है।      गो माता के विषय में भारतीय ज्योतिष अनुसंधान केंद्र कुछ रोचक जानकारी पेश करते हुए....! 1. गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनन्दपूर्वक चैन की सांस लेती है। वहाँ वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं।        2. जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस जगह देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं।  3. गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है।  4. जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है।  5. गौ माता के खुर्र में नागदे...

प्रातः स्मरणीय मंत्र एवं स्तोत्र

प्रातः स्मरणीय मंत्र एवं स्तोत्र  🔸🔹🔹🔸🔸🔹🔹🔸 ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुंडरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ । निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।  ब्रह्मानंदं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिम् । द्वंद्वातीतं गगनसदृशं, तत्त्वमस्यादिलक्षम् । एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधी: साक्षीभूतम् । भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरूं तं नमामि ।। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरु: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवै नम: ।।  शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं । विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् । वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ।।  सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥ परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥ वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥ एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यत...

21.01 भगवान् श्री कृष्ण "के जीवन से जुड़े 24 रहस्यमय तथ्य

क्या आप "भगवान् श्री कृष्ण "के जीवन से जुड़े 24 रहस्यमय तथ्य जानते हैं, यदि नहीं तो कृपया जानिये:------ (1). भगवान् श्री कृष्ण के खड्ग का नाम 'नंदक', गदा का नाम 'कौमौदकी' और शंख का नाम 'पांचजन्य' था जो गुलाबी रंग का था। (2.)भगवान् श्री कॄष्ण के परमधाम गमन के समय ना तो उनका एक भी केश (बाल) श्वेत था और ना ही उनके शरीर पर कोई झुर्रियां थीं। (3.)भगवान् श्री कॄष्ण के धनुष का नाम शारंग व मुख्य आयुध चक्र का नाम ' सुदर्शन' था। वह लौकिक ,दिव्यास्त्र व देवास्त्र तीनों रूपों में कार्य कर सकता था । सुदर्शन चक्र की बराबरी के विध्वंसक केवल दो अस्त्र और थे पाशुपतास्त्र ( शिवजी , भगवान् कॄष्ण और अर्जुन के पास थे) और प्रस्वपास्त्र ( शिवजी , वसुगण , भीष्म और कॄष्ण के पास थे) । (4.)भगवान् श्री कॄष्ण की परदादी 'मारिषा' व सौतेली मां रोहिणी (बलरामजी की मां) 'नाग' जनजाति की थीं। (5.) भगवान श्री कॄष्ण से जेल में बदली गई यशोदाजी की पुत्री का नाम एकानंशा था, जो आज विंध्यवासिनी देवी या विंध्याचलि माँ के नाम से पूजी जातीं हैं। (6.) भगवान् श्री कॄष्ण की प्र...

31.02 भजन || मिक्स || हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे

31.02 भजन || मिक्स || हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा  कृष्णा कृष्णा हरे हरे हम तो बैठ गए हैं आकर तेरे ही धाम दर्शन दे ना दे ये है तेरा काम हम से जो भी गलती हो गई माफ़ कर देना जाते हो चले जाना मेरा पैगाम लेते जाना हमको भी बुला लेना मेरा पैगाम देकर आना जाते हो चले जाना हरे कृष्णा हरे कृष्णा  कृष्णा कृष्णा हरे हरे हम तो बैठ गए हैं आकर तेरे धाम दर्शन दे ना दे ये है तेरा काम हम से जो भी गलती हो गई, माफ़ कर देना जाते हो चले जाना मेरा पैगाम लेते जाना हमको भी बुला लेना मेरा पैगाम देकर आना जाते हो चले जाना प्यार न जाने सारी दुनिया, प्यार जाने श्याम यारा खाटू में जो इकबाल आ जाएं, वो कहाए श्याम प्यारा जल्दी कऽर पहले जा तु, जल्दी कऽर पहले जा तु हरे कृष्णा हरे कृष्णा  कृष्णा कृष्णा हरे हरे ओ हम तो जाएँगे, अब तो गाड़ी से वो आने वाली है दो घंटे के पीछे ऐसा है तो हाथ बढ़ाकर ढ़ोल उठाना और गाते रहिए मौसम है सुहाना मेरा पैगाम लेते जाना हमको खाटूऽ बुलाऽ लेनाऽ मेरा पैगाम देकर आना जाते हो चले जाना श्याम हमारा अच्छा कितना, दिखला देंऽगे हमऽ दूध का दूध पानी...

31.3 भजन || होरी होरी करे रे कान्हा, होरी का दिन आवन दे।

31.3 भजन || होरी होरी करे रे कान्हा, होरी का दिन आवन दे। भजन ||  होरी होरी करे रे कान्हा, होरी का दिन आवन दे। रंग गुलाल उड़े आंगन में, वो फागन तो आवन दे। वो फागन तो आवन दे। होरी है होरी पर मुझको, होरी तो कोई खेलने दो। गोरी गोरी राधा पर, रंग कोई तो लगावन दो। होरी है होरी पर मुझको, होरी तो कोई खेलने दो। होरी होरी करे रे कान्हा, होरी का दिन आवन दे। रंग गुलाल उड़े आंगन में, वो फागन तो आवन दे। वो फागन तो आवन दे। जो तूने की मो से हट खेली तो  तो बहियां पकड़ तुझे बिठा लूंगी। हरि से तुझे हरा बनाय दूंगी  इतना हरा रंग मैं डालूंगी हरा हरा नहीं कोई तुझे कहेगा  चुनरी ओढ़ा हरी बना दुंगी। नर से तोहे नारी बनाय क  बरसाने भर में घुमाई दूंगी। जो तूने की मो से हट खेली तो  तो बहियां पकड़ तुझे बिठा लूंगी। नन्द लाल से तुझे लाल बनाय दूं  इतना लाल रंग मैं डालूं तोपे तोकू लालम लाल बनाय दुंगी चुनरी ओढ़ा लल्ला से तोकू लल्ली सुंदर बनाय दुंगी। नर से तोहे नारी बनाय क  बरसाने भर में घुमाई दूंगी। जो तूने की मो से हट खेली तो  तो बहियां पकड़ तुझे बिठा लूंगी। कटि लहंगा गल म...

31.01 भजन || अरे काऊ दिन पड़ गयो मेरे हाथ लला तोहे लली बनाऊंगी...😑

31.01 भजन || अरे काऊ दिन पड़ गयो मेरे हाथ लला तोहे लली बनाऊंगी...😑 भजन ||  अरे काऊ दिन पड़ गयो मेरे हाथ लला तोहे लली बनाऊंगी...😑 लली बनाऊंगी लला तोहेऽ लली बनाऊंगी, अरे काऊ दिन पड़ गयो मेरे हाथ लला तोहे लली बनाऊंगी... 😏 दही चुराएऽ मटकी फोड़ेऽ बहुत सताए है  दही चुराएऽ मटकी फोड़ेऽ बहुत सताए है  अच्छे भले कपड़ो की तूऽ गत बनाए है  अच्छे भले कपड़ो की तूऽ गत बनाए है  जा दिन मेरे हाथ लगो तो बहुत पछताएगोऽ  जा दिन मेरे हाथ लगो तो बहुत पछताएगोऽ  इक ना सुनूंगी लला तेरी मैं तोहे लली बनाऊंगी। अरे काऊ दिन पड़ गयो मेरे हाथ... बंसी छीनू पितांबर छीनू मुकुट छिनाऊंगी, बंसी छीनू पितांबर छीनू मुकुट छिनाऊंगी, जो तेरे सखा बचावन आवें संग नचावंगी, जो तेरे सखा बचावन आवें संग नचावंगी, फैट से बनाए लियो कोड़ों मार लगाऊंगी...👊 अरे काऊ दिन पड़ गयो मेरे हाथ... कटि लहंगा गल माल ओ चुनरी पहराऊंगी, कटि लहंगा गल माल ओ चुनरी पहराऊंगी, बिंदी भाल नयन में कजरा नथ पहराऊंगी, बिंदी भाल नयन में कजरा नथ पहराऊंगी, जो मैया तेरी मोसे लड़ी तो खरी सुनाऊंगी...😠 अरे काऊ दिन पड़ गयो मेरे हाथ... नारायण...

21.01 *श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन वृत्त*

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*श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन वृत्त* भगवान श्रीकृष्‍ण चंद्र का जन्‍म और कुण्‍डली  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को महानिशीथ काल में वृषभ लग्न में हुआ। उस समय चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण कर रहे थे। रात्रि के ठीक 12 बजे क्षितिज पर वृषभ लग्न उदय हो रहा था तथा चंद्रमा और केतु लग्न में विराजित थे। चतुर्थ भाव सिंह राशि मे सूर्यदेव, पंचम भाव कन्या राशि में बुध, छठे भाव तुला राशि में शुक्र और शनिदेव, सप्तम भाव वृश्चिक राशि में राहु, भाग्य भाव मकर राशि में मंगल तथा लाभ स्थान मीन राशि में बृहस्पति स्थापित हैं। भगवान श्री कृष्ण की जन्मकुंडली में राहु को छोड़कर सभी ग्रह अपनी स्वयं राशि अथवा उच्च अवस्था में स्थित हैं। यह ग्रहों की गणितीय स्थिति है। हालांकि श्रीकृष्‍ण की जन्‍म कुण्‍डली (Shri Krishna Janam Kundali) को लेकर कई भेद हैं, लेकिन यह गणितीय स्थिति अब तक सर्वार्थ शुद्ध उपलब्‍ध है। इसके कई प्रमाण हमें मिलते हैं। श्रीमद्भागवत की अन्वितार्थ प्रकाशिका टीका में दशम स्‍कन्‍ध के तृतीय अध्‍याय की व्‍याख्‍या में पंडित गंगासहाय ने ख...