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04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 22 || श्रीकृष्‍ण का नन्‍दराज को वरूणलोक से ले आना

श्री गर्ग संहिता 04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 22 || श्रीकृष्‍ण का नन्‍दराज को वरूणलोक से ले आना और गोप-गोपियों को वैकुण्‍ठधाम का दर्शन कराना। श्री नारद जी कहते हैं:- एक दिन की बात है, नन्‍दराज एकादशी का व्रत करके द्वादशी को निशीथ-काल में ही ग्‍वालों के साथ यमुना-स्‍नान के लिये गये और जल में उतरे, वहाँ वरूण का एक सेवक उन्‍हें पकड़कर वरूण-लोक में ले गया। मैथिलेश्वर, उस समय ग्‍वालों में कुहराम मच गया, तब उन सबको आश्वासन दे भगवान श्रीहरि वरूणपुरी में पधारे और उन्‍होंने सहास उस पुरी के दुर्ग को भस्‍म कर दिया। करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्‍वी श्रीहरि को अत्‍यन्‍त कुपित हुआ देख वरूण ने तिरस्‍कृत होकर उन्‍हें नमस्‍कार किया और उनकी परिक्रमा करके हाथ जोड़कर कहा। वरूण बोले - श्रीकृष्‍णचन्‍द्र को नमस्‍कार है, परिपूर्णतम परमात्‍मा तथा असंख्‍य ब्रह्माण्‍डों का भरण-पोषण करने वाले गोलोकपति को नमस्‍कार है।  चतुर्व्‍यूह के रूप में प्रकट तेजोमय श्रीहरि को नमस्‍कार है। सर्वतेज: स्‍वरूप आप परमेश्वर को नमस्‍कार है, सर्वस्‍वरूप आप परब्रह्म परमात्‍मा को नमस्‍कार है।  मेरे किसी मूर्ख सेवक ने यह पहली आ...