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01 गोलोक खण्ड || अध्याय 04 नन्द आदि के लक्षण; गोपीयूथ का परिचय; श्रुति आदि के गोपीभाव की प्राप्ति में कारणभूत पूर्व प्राप्त वरदानों का विवरण

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गर्ग संहिता  गोलोक खण्ड  अध्याय 4 नन्द आदि के लक्षण; गोपीयूथ का परिचय; श्रुति आदि के गोपीभाव की प्राप्ति में कारणभूत पूर्व प्राप्त वरदानों का विवरण भगवान ने कहा- ब्रह्मन ! ‘सुबल’ और ‘श्रीदामा’ नाम के मेरे सखा नन्द तथा उपनन्द के घर पर जन्म धारण करेंगे। इसी प्रकार और भी मेरे सखा हैं, जिनके नाम ‘स्तोककृष्ण’, ‘अर्जुन’ एवं ‘अंशु’ आदि हैं, वे सभी नौ नन्दों के यहाँ प्रकट होंगे। व्रजमण्डल में जो छ: वृषभानु हैं, उनके गृह में विशाल, ऋषभ, तेजस्वी, देवप्रस्थ और वरूथप नाम के मेरे सखा अवतीर्ण होंगे। श्रीब्रह्माजी ने पूछा- देवेश्वर ! किसे ‘नन्द’ कहा जाता है और किसे ‘उपनन्द’ तथा ‘वृषभानु’ के क्या लक्षण हैं? श्रीभगवान कहते हैं- जो गोशालाओं में सदा गौंओं का पालन करते रहते हैं एवं गो-सेवा ही जिनकी जीविका है, उन्हें मैंने ‘गोपाल’ संज्ञा दी है। अब तुम उनके लक्षण सुनो। गोपालों के साथ नौ लाख गायों के स्वामी को ‘नन्द’ कहा जाता है। पाँच लाख गौओं का स्वामी ‘उपनन्द’ पद को प्राप्त करता है। ‘वृषभानु’ नाम उसका पड़ता है, जिसके अधिकार में दस लाख गौएँ रहती हैं, ऐसी ही जिसके यहाँ एक करोड़ॅ गौओं की ...