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07. विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 11 || दन्‍तवक्र की पराजय तथा करुष देश पर यादव-सेना की

गर्ग संहिता  विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 11 || दन्‍तवक्र की पराजय तथा करुष देश पर यादव-सेना की  श्रीनारदजी कहते हैं- तब श्रीकृष्‍ण के अठारह महारथी पुत्रों ने मिलकर दन्‍तवक्र को क्षत विक्षत कर दिया। घायल हुआ दन्‍तवक्र रक्‍तधारा से रंजित हो उसी प्रकार अत्‍यन्‍त शोभा पाने लगा, जैसे महावर क रंग से रँगा हुआ कोई ऊँचा महल से शोभित हो रहा हो। उसने शत्रुओं के प्रहार को कुछ भी नहीं गिना। कृतवर्मा ने समरांगण में उसे बाण-समूहों द्वारा घायल किया, सात्‍यकि ने तलवार से चोट पहॅुचायी और अक्रूर ने उस महाबली वीर पर शक्ति से प्रहार किया। रोहिणीनन्‍दन सारण ने उसके ऊपर कुठार से आघात किया। रणदुर्मद दन्‍तवक्र ने भी सात्‍यकि के गदा से चोट पहुँचायी, कृतवर्मा को हाथों से और अक्रूर को लात से मारा तथा सारण को भुजाओं के वेगस से आहत कर दिया। अक्रूर, वृतवर्मा, सात्‍यकि और सारण ये चारों वीर आँधी के उखाडे़ हुए वृक्षों की भाँति मूर्च्छित होकर पृथ्‍वी पर गिर पडे़ तदनन्‍तर जाम्‍बवती कुमार साम्‍ब ने उसकी गदा लेकर, गदा के ऊपर अपनी गदा रखकर उससे दन्‍तवक्र को मारा। दन्‍तवक्र ने गदा फेंक दी और जाम्‍बवती कुमार साम्‍ब को ...