10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 29 || यादवों और असुरों का घोर संग्राम तथा ऊर्ध्वकेश एवं अनिरुद्ध का द्वंद्व युद्ध
10. अश्वमेध खण्ड || अध्याय 29 || यादवों और असुरों का घोर संग्राम तथा ऊर्ध्वकेश एवं अनिरुद्ध का द्वंद्व युद्ध श्रीगर्ग कहते हैं - राजेंद्र ! तदनन्तर उर्ध्व केश आदि चार मंत्री कवच बाँधकर करोड़ों दैत्यों की सेना के साथ युद्ध के लिए नगर से बाहर निकले। नरेश्वर ! वे सब के सब धनुर्धर तथा विद्याधरों के समान शौर्य संपन्न थे। लोहे का कवच बाँध कर खड्ग, शूल, गदा, परिघ, मुद्गर, एकघ्नी, दशघ्नी, शतध्नी, भुशुण्डी, भाले, भिन्दिपाल, चक्र, सायक, शक्ति आदि संपूर्ण अस्त्र–शस्त्रों से सुसज्जित थे। हाथी, घोड़े, रथ, नीलगाय, गाय, भैंस, मृग, ऊंट, गधे, सूअर, भेड़िये, सिंह, सियार, बड़े–बड़े गीध, शंख, चील, मगर और तिमिंगल– इन वाहनों पर चढ़कर वे रण कर्कश दैत्य युद्ध के मैदान में उतरे। उस समय शंख और दुन्दुभियों के नाद से, वीरों की सिंह गर्जना से और शतघ्नियों (तोपों) की आवाज से धरती बार–बार हिलने लगी। असुरों की ऐसी भयंकर सेना देखकर महेंद्र, कुबेर आदि सब देवता भयभीत हो गए। जिन्होंने अनेक बार भूतल पर विजय पाई थी, वे बलवान यादव भी दैत्यों की सेना देखकर मन ही मन विषाद का अनुभव करने लगे। पहले प्रद्युम्न ने राजसूय यज...