05. मथुराखण्ड || अध्याय 25 || मथुरापुरी का माहात्म्य मथुरा खण्ड का उपसंहार
गर्ग संहिता मथुराखण्ड : अध्याय 25 मथुरापुरी का माहात्म्य मथुरा खण्ड का उपसंहार बहुलाश्व ने पूछा- मुने ! जहाँ बलरामजी अकस्मात पहुँचे गये, वहाँ ऐसा उत्तम तीर्थ सुना गया। अहो ! मथुरापुरी धन्य है, जहाँ वे नित्य निवास करते हैं। मथुरा का देवता कौन है? क्षत्ता (द्वारपाल) कौन हैं ? उसकी रक्षा कौन करता हैं ? चार कौन है ? मन्त्रिप्रवर कौन हैं ? और किन-किन लोगों के द्वारा वहाँ भूमिका सेवन किया गया है ? श्रीनारदजी ने कहा- राजन् ! साक्षात परिपूर्णतम भगवान श्री कृष्ण हरि मथुरा के स्वामी या देवता हैं। भगवान केशवदेव वहाँ के क्लेशनाशक हैं साक्षात भगवान ने कपिल नामक ब्राह्मण को अपनी वाराह मूर्ति प्रदान की थी। कपिल ने प्रसन्न होकर वह मूर्ति देवराज इंद्र को दे दी। फिर समस्त लोकों को रूलाने वाला राक्षसराज रावण देवताओं को जीतकर उस मूर्ति का स्तवन करके उसे पुष्पक विमान पर रखकर लंका में ले आया उसकी पूजा करने लगा। मिथिलेश्वर ! तदनन्तर राघवेन्द्र श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करके भगवान वाराह को प्रयत्न पूर्वक अयोध्...