07. विश्वजितखण्ड || अध्याय 05 ||यादव-सेना की कच्छ और कलिंग देश पर विजय
गर्ग संहिता 07. विश्वजितखण्ड || अध्याय 05 || यादव-सेना की कच्छ और कलिंग देश पर विजय श्रीबहुलाश्व ने पूछा- देवर्षि शिरोमणे ! श्रीहरि के पुत्र प्रद्युम्न क्रमश: किन-किन देशों को जीतने के लिये गये, उनके उदार कर्मों का मेरे समक्ष वर्णन कीजिये। अहो ! भगवान श्रीकृष्णचन्द्र की अपने भक्तों पर ऐसी कृपा है, जो श्रवण और जाने पर पापीजनों को उनके कुल सहित पवित्र कर देती है। श्रीनारदजी कहते हैं- राजन् ! तुमने बहुत अच्छ बात पूछी है। तुम्हारी विमल बुद्धि को साधुवाद ! श्रीकृष्ण के भक्तों का चरित्र तीनों लोकों को पवित्र कर देता है। राजन्! वर्षाकाल में बादलों से बरसती हुई जलधाराओं को तथा भूमि के समस्त धूलिकणों को कोई विद्वान पुरुष भले ही गिन डाले, किंतु महान श्रीहरि गुणों को कोई नहीं गिन सकता। रुक्मिणी नन्दन प्रद्युम्न उस श्वेत छत्र से सुशोभित थे, जिसकी छाया चार योजन तक दिखायी देती थी। वे इन्द्र के दिये हुए रथ पर आरुढ़ हो अपनी सेना के साथ पहले कच्छ देशों को जीतने के लिये उसी प्रकार गये, जैसे पूर्वकाल में भगवान शंकर ने त्रिपुरों को जीतने के लिये रथ से यात्रा की थी। कच्छ द...