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04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 13 || देवांगना स्‍वरूपा गोपियो का वर्णन।

श्री गर्ग संहिता 04. माधुर्य खण्‍ड || अध्याय 13 || देवांगना स्‍वरूपा गोपियो का वर्णन। श्रीनारदजी कहते हैं:- मिथिलेश्वर, अब देवांगनास्‍वरूपा गोपियों का वर्णन सुनो, जो मनुष्‍यों को चारों पदार्थ देने वाला तथा उनके भक्ति भाव को बढ़ाने वाला सर्वोत्तम साधन है।  मालवदेश में एक गोप थे, जिनका नाम था दिवस्‍पति नन्‍द, उनके एक सहस्‍त्र पत्नियाँ थीं। वे बडे़ धनवान और नीतिज्ञ थे, एक समय तीर्थ यात्रा के प्रसंग से उनका मथुरा में आगमन हुआ।  वहाँ व्रजाधीश्वर नन्‍दराज का नाम सुनकर वे उनसे मिलने के लिये गोकुल गये। वहाँ नन्‍दराज से मिलकर और वृन्‍दावन की शोभा देखकर महामना दिवस्‍पति नन्‍द-राज की आज्ञा से वहीं रहने लगे।  उन्‍होनें दो योजन भूमि को घेर कर गोओं के लिये गोष्‍ठ बनाया। राजन् , उस व्रज में अपने कुटुम्‍बी बन्‍धुजनों के साथ रहते हुए दिवस्‍पति बड़ी प्रसन्‍नता प्राप्‍त हुई। देवल मुनि के आदेश से समस्‍त देवांग्‍नाएँ उन्‍हीं दिवस्‍पति की महादिव्‍य कन्‍याएँ हुई, जो प्रज्‍वलित अग्नि के समान तेजस्विनी थीं। किसी समय श्‍यामसुन्‍दर श्रीकृष्‍ण का दर्शन प्राकर वे सब कन्‍याएँ मोहित हो गयीं और उन दामोद...