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10. अश्‍वमेध खण्‍ड || अध्याय 46 || श्रीकृष्ण के आगमन से गोपियों को उल्लास, श्रीहरि के वेणुगीत की चर्चा से श्रीराधा की मूर्च्छा का निवारण, श्रीहरि का श्रीराधा आदि गोप सुंदरियों के साथ वन विहार, स्थल विहार, जल विहार, पर्वत विहार और रास क्रीड़ा

10. अश्‍वमेध खण्‍ड || अध्याय 46 || श्रीकृष्ण के आगमन से गोपियों को उल्लास, श्रीहरि के वेणुगीत की चर्चा से श्रीराधा की मूर्च्छा का निवारण, श्रीहरि का श्रीराधा आदि गोप सुंदरियों के साथ वन विहार, स्थल विहार, जल विहार, पर्वत विहार और रास क्रीड़ा श्रीगर्गजी कहते हैं- राजन् ! श्रीकृष्ण को आया देख वे सब गोप सुंदरियां हर्ष से उल्लासित हो उठीं और दु:ख त्यागकर जय जय कार करने लगीं। श्रीराधा मूर्च्छा में ही पड़ी थीं। उनकी अवस्था देख गोपांगनाओं के प्रार्थना करने पर श्रीहरि उन्हें होश में लाने के लिए उस व्रजभूमि में वंशीनाद करने लगे। तब भी राधिका नहीं उठी। यह देख श्रीराधा वल्लभ हरि उन्हें बार बार वेणु गीत सुनाने लगे। राजन् ! वह गीत सुनकर श्रीराधा उठी, किंतु वियोग जनित दु:ख का स्मरण करके माधव के देखते देखते फिर मूर्च्छित हो गईं। तब श्रीकृष्ण के वेणु गीत से प्रसन्न हुई चंद्रानना नाम वाली सखी उनका आदेश पाकर तत्काल चंद्रावली के प्रति श्रीराधा को ही संबोधित करके बोली । चंद्रानना ने कहा– हे राधे ! जो श्रीकृष्णचंद्र पहले तुम्हारे नाम से रूठ कर चले गए थे, वे मानो एक युग के बाद फिर आ गए हैं। उन्हीं देवकीनं...