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07. विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 25 || प्रद्युम्न का एक युक्ति के द्वारा गणेशजी को रणभूमिसे हटाकर गुह्यक सेना पर विजय प्राप्‍त करना और कुबेर का उनके लिये बहुत-सी भेंट-सामग्री देकर उनकी स्‍तुति करना; फिर प्राग्‍ज्‍योतिषपुर में भेंट लेकर प्रद्युम्न का विरोधी वानर द्विविद को किष्किन्‍धा में फेंक देना

07. विश्वजित खण्‍ड || अध्याय 25 ||  प्रद्युम्न का एक युक्ति के द्वारा गणेशजी को रणभूमि से हटाकर गुह्यक सेना पर विजय प्राप्‍त करना और कुबेर का उनके लिये बहुत-सी भेंट-सामग्री देकर उनकी स्‍तुति करना; फिर प्राग्‍ज्‍योतिषपुर में भेंट लेकर प्रद्युम्न का विरोधी वानर द्विविद को किष्किन्‍धा में फेंक देना प्रद्युम्न बोले-  बेटा ! ये महाबली गणेश साक्षात भगवान श्री कृष्ण की कला हैं। इन्‍हें देवता भी नहीं जीत सकते, फिर भूतल के मनुष्‍यों तो बात ही क्‍या है जिनके निकट इनका वास है, उनके पक्ष की पराजय नहीं होती। पूर्वकाल में भगवान श्रीकृष्‍ण ने शिवलोक में इन्‍हें ऐसा ही वर दिया था। यदि ये यहाँ रहेंगे तो हम लोगों की कदापि विजय नहीं हो सकती। भगवान श्री कृष्ण के वरदान से इनका बल बहुत बढ़ा-चढ़ा है और ये शत्रु पक्ष में चले गये हैं। इसलिये तुम प्रचण्‍ड मार्जार (बड़ा भारी बिलाव) होकर हुंकार करते हुए युद्धभूमि से बलपूर्वक इनके चूहे को मार भगाओ। इस महायुद्ध में अपने फूत्‍कारों के द्वारा दसों दिशाओं में उसे खदेड़ो। जब तक मैं शत्रु सेना पर विजय पाता हूँ, तब तक इसे शीघ्र...