02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 26 ||श्रीकृष्ण का विरजा के साथ विहार; श्रीराधा के भय से विरजा का नदी रूप होना, उसके सात पुत्रों का उसी शाप से सात समुद्र होना तथा राधा के शाप से श्रीदामा का अंशत: शंखचूड़ होना
गर्ग संहिता 02. वृन्दावन खण्ड || अध्याय 26 || श्रीकृष्ण का विरजा के साथ विहार; श्रीराधा के भय से विरजा का नदी रूप होना, उसके सात पुत्रों का उसी शाप से सात समुद्र होना तथा राधा के शाप से श्रीदामा का अंशत: शंखचूड़ होना बहुलाश्व ने पूछा - महामते देवर्षे ! आप परावरवेत्ताओं में श्रेष्ठ हैं। अत: यह बताइये कि अघासुर आदि दैत्यों की ज्योति तो भगवान श्रीकृष्ण में प्रविष्ट हुई थी, परंतु शंखचूड़ का तेज श्रीदामा में लीन हुआ; इसका क्या कारण है ? अहो ! श्रीकृष्ण चन्द्र का चरित्र अत्यंत अद्भुत है। श्री नारद जी बोले - महामते नरेश ! यह पूर्वकाल में घटित गोलोक का वृत्तांत है, जिसे मैंने भगवान नारायण के मुख से सुना था। यह सर्वपापहारी पुण्य-प्रसंग तुम मुझसे सुनो। श्रीहरि के तीन पत्नियाँ हुई- श्रीराधा, विजया (विरजा) और भूदेवी। इन तीनों में महात्मा श्रीकृष्ण को श्रीराधा ही अधिक प्रिय हैं। राजन! एक दिन भगवान श्रीकृष्ण एकांत कुंज में कोटि चन्द्रमाओं की-सी कांति वाली तथा श्रीराधिका-सदृश सुन्दरी विरजा के साथ विहार कर रहे थे। सखी के मुख से यह सु...